उत्तर भारत का पर्वतीय प्रदेश (Northern Mountain Region of India) देश का वह मुकुट है, जो अपनी विशाल हिमालयी श्रृंखलाओं, सदानीर नदियों और अद्वितीय जैव विविधता के लिए विश्व में विख्यात है। यदि आप हिमालय का भौगोलिक वर्गीकरण, महान, लघु और शिवालिक हिमालय, प्रमुख चोटियाँ, दर्रे और हिमनद सरल भाषा में समझना चाहते हैं, तो यह मार्गदर्शिका आपके लिए है। UPSC, State PSC, RAS, SSC जैसी परीक्षाओं में इन विषयों से प्रश्न बहुतायत में आते हैं। खास बात यह है कि हिमालय के बर्फीले इलाकों में जनगणना 2027 देश के बाकी हिस्सों से पहले, सितंबर 2026 में कराई गई, इसलिए हम आगे जनगणना से जुड़ा पहलू भी समझेंगे।
📑 इस लेख में
उत्तर भारत का पर्वतीय प्रदेश (Uttar Bharat ka Parvatiya Pradesh)
उत्तर भारत का पर्वतीय प्रदेश अपनी प्राकृतिक सुंदरता और भौगोलिक विविधता के लिए प्रसिद्ध है। इसमें मुख्य रूप से हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर, लद्दाख और सिक्किम तथा पूर्वोत्तर के पहाड़ी भाग शामिल हैं। यहाँ की बर्फ से ढकी चोटियाँ, हरे-भरे जंगल, झीलें और नदियाँ इसे पर्यटन का बड़ा केंद्र बनाती हैं। गंगा, यमुना और ब्रह्मपुत्र जैसी नदियों के स्रोत भी इसी क्षेत्र में हैं, जो इसे भारत का जल-स्रोत बनाते हैं।

भारत को ऊँचाई और निचाई के आधार पर छह प्रमुख भौतिक विभागों में बाँटा गया है, जो इसकी भौगोलिक विविधता दर्शाते हैं –
- उत्तर भारत का पर्वतीय प्रदेश
- उत्तरी मैदान
- प्रायद्वीपीय पठार
- भारतीय मरुस्थल
- तटीय मैदान
- द्वीप समूह
इस लेख में हम हिमालय पर्वतीय प्रदेश पर विस्तार से चर्चा करेंगे। हिमालय की श्रृंखलाएँ, ऊँचे दर्रे, घाटियाँ और हिमनद इस प्रदेश की प्रमुख विशेषताएँ हैं। यह क्षेत्र भारत की जलवायु को नियंत्रित करता है और प्रमुख नदियों का उद्गम स्थल भी है।
हिमालय पर्वतीय प्रदेश
- हिमालय के गर्भ भाग में स्थित चट्टानें आग्नेय (ग्रेनाइट, नीस व शिष्ट) प्रकार की हैं, जो अत्यन्त प्राचीन हैं।
- हिमालय एक नवीन वलित एवं युवा पर्वतमाला है, जिसकी उत्पत्ति सेनोज़ोइक (कैन्योजोइक) महाकल्प के टर्शियरी काल में हुई। इसका निर्माण भारतीय और यूरेशियाई प्लेटों की टक्कर से हुआ।
- हिमालय विश्व की सबसे ऊँची पर्वत श्रेणी है और एक लगातार (सतत्) चलने वाली शृंखला है।
- करोड़ों वर्ष पूर्व दो विशाल भूखंड थे: उत्तर में अंगारालैण्ड और दक्षिण में गोंडवानालैण्ड। इनके बीच टैथिस सागर था। दोनों ओर से नदियों द्वारा लाया गया मलबा इस सागर में जमा होता रहा। भू-भागों के आपसी दबाव से यह मलबा ऊपर उठकर मध्य महाद्वीपीय पर्वत शृंखला (हिमालय) बन गया।

- हिमालय भारत की उत्तरी सीमा पर पश्चिम से पूर्व एक बड़े चाप के रूप में फैला है। पुस्तकों के अनुसार इसका क्षेत्रफल लगभग 5 लाख वर्ग किमी और लंबाई लगभग 2,500 किमी है।
- चौड़ाई कश्मीर में लगभग 400 किमी और अरुणाचल प्रदेश में लगभग 150 किमी है।
- भारत में इसका विस्तार पश्चिम में सिंधु घाटी के नंगा पर्वत से पूर्व में ब्रह्मपुत्र घाटी के नामचा बरवा तक माना जाता है। ध्यान रहे, ये दोनों शिखर आज भारत के प्रशासन में नहीं हैं: नंगा पर्वत गिलगित-बाल्टिस्तान (पाक-अधिकृत) में और नामचा बरवा तिब्बत (चीन) में है।
- एशिया में 7,300 मी. से ऊँची 94 चोटियाँ हैं, जिनमें से 92 हिमालय और काराकोरम में हैं। हिमालय की कई चोटियाँ 8,000 मी. से भी ऊँची हैं।
- भारतीय हिमालयी क्षेत्र (IHR) में जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा, मेघालय तथा असम और पश्चिम बंगाल के पहाड़ी जिले (दार्जिलिंग, कलिम्पोंग आदि) गिने जाते हैं। यानी कुल 13 राज्य/केंद्रशासित प्रदेश (कुछ पूरे, कुछ आंशिक)। कुछ पुस्तकों में ‘11 राज्य’ भी लिखा मिलता है।
- हिमालय अपनी वर्षा का अधिकांश भाग दक्षिण-पश्चिम मानसून से पाता है।
- पश्चिमी भाग की तुलना में पूर्वी हिमालय में जैव विविधता अधिक है।
हिमालय का भौगोलिक विभाजन (Himalaya ka Bhogolik Vibhajan)
उपविभाजन के आधार पर हिमालय को चार भागों में बाँटा जाता है –
- महान हिमालय
- लघु हिमालय
- शिवालिक हिमालय
- ट्रांस हिमालय

(1) महान हिमालय
- महान हिमालय को वृहद् हिमालय, आन्तरिक हिमालय, हिमाद्री आदि नामों से जाना जाता है।
- यह हिमालय का सबसे प्राचीन, सबसे लंबा और सबसे ऊँचा भाग है। इसका निर्माण पुस्तकों के अनुसार इयोसीन-ओलिगोसीन काल (लगभग 5 से 3 करोड़ वर्ष पूर्व) में हुआ। इसे ‘हिमालय की रीढ़’ कहते हैं।
- इसकी सबसे ऊँची चोटियाँ सदैव बर्फ से ढकी रहती हैं, इसलिए इसे ‘हिमाद्री’ (बर्फीला हिमालय) कहा गया है।
- यहाँ बड़े-बड़े ग्लेशियर हैं, जिनसे नदियाँ निकलती हैं, इसलिए यह जल संसाधन की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है।

- पुस्तकों के अनुसार इसकी लंबाई लगभग 2,400 किमी, चौड़ाई लगभग 25 किमी और औसत ऊँचाई लगभग 6,000 मी. है।
- दक्षिणी ढाल (भारत की ओर) खड़ा और तीव्र है, जबकि उत्तरी (तिब्बत की ओर) ढाल मंद है।
- गंगा और यमुना के स्रोत (गंगोत्री व यमुनोत्री हिमनद) इसी श्रेणी में हैं। सिंधु, सतलुज, ब्रह्मपुत्र और अलकनंदा जैसी नदियों ने इस श्रेणी को काटकर गहरी पूर्ववर्ती घाटियाँ बनाई हैं।
- इसके उत्तरी भाग (टैथिस हिमालय) की परतदार चट्टानों में समुद्री जीव-जंतुओं के जीवाश्म मिलते हैं, क्योंकि ये चट्टानें टैथिस सागर के अवसादों से बनी हैं।
- विश्व की सबसे ऊँची चोटी माउंट एवरेस्ट (नेपाल-तिब्बत सीमा) इसी श्रेणी में है।
महान हिमालय की प्रमुख चोटियाँ
| पर्वत | देश / अवस्थिति | ऊँचाई (पुस्तक / विकिपीडिया) |
|---|---|---|
| माउंट एवरेस्ट | नेपाल-तिब्बत सीमा | 8,848 मी. / 8,848.86 मी. |
| कंचनजंगा | भारत (सिक्किम)-नेपाल सीमा | 8,598 मी. / 8,586 मी. |
| मकालू | नेपाल-तिब्बत सीमा | 8,481 मी. / 8,485 मी. |
| धौलागिरि | नेपाल | 8,172 मी. / 8,167 मी. |
| मानसलू | नेपाल | 8,152 मी. / 8,163 मी. |
| नंगा पर्वत | गिलगित-बाल्टिस्तान (पाक-अधिकृत) | 8,126 मी. |
| अन्नपूर्णा | नेपाल | 8,078 मी. / 8,091 मी. |
| नंदा देवी | भारत (उत्तराखंड) | 7,817 मी. / 7,816 मी. |
| कामेट | भारत (उत्तराखंड) | 7,756 मी. |
| नामचा बरवा | तिब्बत (चीन) | 7,756 मी. / 7,782 मी. |
| गुरला मांधाता | तिब्बत (चीन) | 7,728 मी. / 7,694 मी. |
1. माउंट एवरेस्ट – नेपाल में इसे ‘सागरमाथा’, तिब्बत में ‘चोमोलुंग्मा’ कहा जाता है। इसकी ऊँचाई की गणना भारतीय सर्वेक्षण विभाग (Survey of India) के दल ने 1850 के दशक में की, जिसमें गणितज्ञ राधानाथ सिकदर की प्रमुख भूमिका थी। 1865 में सर्वेक्षक जनरल सर जॉर्ज एवरेस्ट के नाम पर इसका नाम ‘एवरेस्ट’ रखा गया। (जॉर्ज एवरेस्ट ने इसकी खोज नहीं की थी।)
2. गॉडविन ऑस्टिन (K2) – विश्व की दूसरी सबसे ऊँची चोटी (लगभग 8,611 मी.), काराकोरम श्रेणी में। यह वर्तमान में पाक-अधिकृत गिलगित-बाल्टिस्तान में है, पर भारत इस क्षेत्र को अपना मानता है। इसलिए पुस्तकों में इसे ‘भारत की सबसे ऊँची चोटी’ लिखा जाता है।
3. कंचनजंगा – विश्व की तीसरी सबसे ऊँची चोटी। यह भारत के प्रशासन वाले क्षेत्र की सबसे ऊँची चोटी है और सिक्किम में नेपाल की सीमा पर स्थित है।
महान हिमालय के प्रमुख दर्रे – नाथुला, शिपकी ला, जोजिला, माना, नीति, लिपुलेख आदि। (काराकोरम दर्रा काराकोरम श्रेणी में है, महान हिमालय में नहीं।)
महान हिमालय के प्रमुख हिमनद – गंगोत्री, यमुनोत्री, चोराबारी, सतोपंथ, पिंडारी, जेमू आदि।
(2) लघु हिमालय
- लघु हिमालय को मध्य हिमालय, निम्न हिमालय और हिमाचल हिमालय भी कहते हैं।
- यह महान हिमालय से मुख्य केंद्रीय भ्रंश (MCT) द्वारा अलग होता है।
- यह शिवालिक और महान हिमालय के बीच, महान हिमालय के समानांतर दक्षिण में स्थित है।
- यह अत्यधिक संपीडित और परिवर्तित (कायांतरित) शैलों से बना है, जिनमें जीवाश्म प्रायः नहीं मिलते।
- यहाँ की पर्वत श्रेणियाँ वर्ष में दो-तीन महीने हिमाच्छादित रहती हैं।

- पुस्तकों के अनुसार इसका निर्माण मायोसीन युग में हुआ। लंबाई लगभग 2,500 किमी, चौड़ाई लगभग 50 किमी और ऊँचाई लगभग 3,700 से 4,500 मी. है।
- इसकी सबसे लंबी पर्वत शृंखला पीर पंजाल है। इसकी प्रमुख श्रेणियाँ पीर पंजाल, धौलाधर, नागटिब्बा, मसूरी और महाभारत (नेपाल) हैं।
- ढालों पर पाए जाने वाले घास के मैदानों को कश्मीर में ‘मर्ग’ (सोनमर्ग, गुलमर्ग) और उत्तराखंड में ‘बुग्याल/पयार’ कहते हैं।
- स्वास्थ्यवर्धक जलवायु के कारण यहाँ शिमला, मसूरी, नैनीताल, रानीखेत, दार्जिलिंग जैसे पहाड़ी नगर विकसित हुए हैं।
- कश्मीर घाटी, कांगड़ा घाटी और कुल्लू घाटी इसी क्षेत्र में हैं।
लघु हिमालय की श्रेणियाँ (पश्चिम से पूर्व)
| श्रेणी | अवस्थिति |
|---|---|
| पीर पंजाल | जम्मू-कश्मीर / हिमाचल |
| धौलाधर | हिमाचल प्रदेश |
| नागटिब्बा, मसूरी | उत्तराखंड |
| महाभारत लेख | नेपाल |
प्रमुख घाटियाँ – कश्मीर घाटी (पीर पंजाल और महान हिमालय के बीच), कांगड़ा घाटी, कुल्लू घाटी (हिमाचल) और काठमांडू घाटी (नेपाल)।
(3) शिवालिक हिमालय
- शिवालिक को उप हिमालय और बाह्य हिमालय भी कहते हैं।
- यह हिमालय की सबसे नवीन पर्वतमाला है। पुस्तकों के अनुसार इसका निर्माण प्लायोसीन (लगभग 1 करोड़ वर्ष पूर्व तक के) काल में हुआ। यह हिमालय की सबसे दक्षिणी और सबसे बाहरी श्रेणी है।
- यह नदियों द्वारा लाए गए असंपीडित (ढीले) अवसादों, कंकड़-पत्थरों से बनी है, इसलिए भूस्खलन और कटाव का खतरा अधिक रहता है।
- यह लगातार न होकर टुकड़ों में बँटी है। इसका विस्तार पश्चिम में पाकिस्तान के पोटवार बेसिन से पूर्व में असम तक माना जाता है।
- शिवालिक की तलहटी में कंकड़-पत्थर का ढलान भाबर कहलाता है और उसके दक्षिण का दलदली भाग तराई। विस्तार से देखें उत्तर का विशाल मैदान।

- औसत चौड़ाई लगभग 10 से 50 किमी और ऊँचाई लगभग 900 से 1,100 मी. है। इसके दक्षिण में उत्तर का विशाल मैदान है।
- लघु हिमालय और शिवालिक के बीच की लंबवत् (लम्बी) घाटियों को ‘दून’ कहते हैं: देहरादून, कोटलीदून, पाटलीदून। पूर्व में इन्हें ‘द्वार’ भी कहा जाता है, जैसे हरिद्वार। इनमें गहन खेती होती है और ये घनी बसी हैं।
(4) ट्रांस हिमालय
- ट्रांस हिमालय को ‘तिब्बत हिमालय’ भी कहा जाता है और संस्कृत में ‘कृष्णगिरि’ कहा गया है। यह हिमालय का सबसे उत्तरी भाग है।
- इसकी औसत ऊँचाई लगभग 4,000 से 4,500 मी. बताई जाती है। यह अवसादी चट्टानों से बना, लगभग वनस्पति-रहित भाग है।
- यह महान हिमालय के उत्तर में उसके समानांतर, तिब्बत के दक्षिणी भाग में फैला है।
- इसके अंतर्गत काराकोरम, लद्दाख, जास्कर और कैलाश श्रेणियाँ आती हैं।
- यह महान हिमालय से इंडो-सांगपो सिवनी क्षेत्र द्वारा अलग होता है।

ट्रांस हिमालय के उपभाग
ट्रांस हिमालय मुख्यतः तीन समानांतर शृंखलाओं से मिलकर बना है – जास्कर, लद्दाख और काराकोरम।
(1) जास्कर श्रेणी – यह महान हिमालय के उत्तर में, उसके समानांतर चलती है और लद्दाख व हिमाचल तक फैली है। कारगिल जिले का द्रास भारत के सबसे ठंडे आबाद स्थानों में गिना जाता है। जास्कर क्षेत्र में नून-कुन जैसे 7,000 मी. से ऊँचे शिखर हैं। पुस्तकों में जास्कर की सबसे ऊँची चोटी के रूप में ‘नंगा पर्वत’ भी लिखा मिलता है, पर नंगा पर्वत वस्तुतः हिमालय का पश्चिमी छोर है। शेषनाग झील कश्मीर में पहलगाम-अमरनाथ मार्ग पर है।
(2) लद्दाख श्रेणी – यह श्रेणी सिंधु के उत्तर में, लेह के आसपास उसके समानांतर फैली है। इसके पूर्व में तिब्बत का कैलाश पर्वत है, जिसके पास सिंधु, सतलुज और ब्रह्मपुत्र जैसी नदियों का उद्गम क्षेत्र है। ध्यान दें, राकापोशी (7,788 मी.) लद्दाख श्रेणी में नहीं, बल्कि काराकोरम में (गिलगित-बाल्टिस्तान में) है। यह अपनी तीव्र ढाल के लिए प्रसिद्ध है।
(3) काराकोरम श्रेणी – इसे ‘उच्च एशिया की रीढ़’ भी कहा जाता है। यह पश्चिम में पामीर की ओर और पूर्व में कैलाश श्रेणी की ओर फैली है। यहीं K2 और विश्व के कई सबसे लंबे हिमनद हैं।
काराकोरम की प्रमुख चोटियाँ –
- K2 (गॉडविन ऑस्टिन) – लगभग 8,611 मी., विश्व की दूसरी सबसे ऊँची चोटी
- हिडन पीक / गशेरब्रुम-I – 8,068 मी. (पुस्तक) / 8,080 मी. (विकिपीडिया)
- ब्रॉड पीक – 8,047 मी. (पुस्तक) / 8,051 मी. (विकिपीडिया)
काराकोरम के प्रमुख हिमनद – सियाचिन (भारत के प्रशासन में लद्दाख में), बाल्टोरो, बियाफो, हिस्पर, बातुरा (ये गिलगित-बाल्टिस्तान में)।
हिमालय का प्रादेशिक वर्गीकरण (Himalaya ka Pradeshik Vibhajan)
सिडनी बुर्रार्ड ने नदी घाटियों के आधार पर हिमालय का चार प्रादेशिक भागों में वर्गीकरण किया है –
| प्रादेशिक भाग | लंबाई (लगभग) | विस्तार |
|---|---|---|
| 1. पंजाब हिमालय | 560 किमी. | सिंधु से सतलुज नदी के मध्य |
| 2. कुमाऊँ हिमालय | 320 किमी. | सतलुज से काली नदी के मध्य |
| 3. नेपाल हिमालय | 800 किमी. | काली से तिस्ता नदी के मध्य |
| 4. असम हिमालय | 720-750 किमी. | तिस्ता से दिहांग (ब्रह्मपुत्र) नदी के मध्य |
1. पंजाब हिमालय
- इसे कश्मीर हिमालय और हिमाचल हिमालय भी कहते हैं। इसका विस्तार जम्मू-कश्मीर, लद्दाख और हिमाचल प्रदेश में है।
- विस्तार सिंधु से सतलुज तक, लंबाई लगभग 560 किमी.।
- प्रमुख श्रेणियाँ: काराकोरम, लद्दाख, पीर पंजाल, जास्कर, धौलाधर।
- इसके अंतर्गत वैष्णो देवी, अमरनाथ गुफा और चरार-ए-शरीफ जैसे स्थल आते हैं।
2. कुमाऊँ हिमालय
- विस्तार सतलुज से काली नदी तक, लंबाई लगभग 320 किमी.। यह लंबाई में सबसे छोटा है।
- इसका विस्तार हिमाचल प्रदेश (सतलुज के पूर्व) और उत्तराखंड में है।
- पश्चिमी भाग गढ़वाल हिमालय और पूर्वी भाग कुमाऊँ हिमालय कहलाता है। ‘फूलों की घाटी’ यहीं है।
- सबसे ऊँची चोटी नंदा देवी (7,817 मी.) है। प्रमुख श्रेणियाँ: कामेट, त्रिशूल, बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री, नंदा देवी।
- गंगा, भागीरथी, अलकनंदा और यमुना का उद्गम यहीं है। गंगोत्री हिमनद इसी क्षेत्र में है।
3. नेपाल हिमालय
- इसे सिक्किम में सिक्किम हिमालय, पश्चिम बंगाल में दार्जिलिंग हिमालय और भूटान में भूटान हिमालय भी कहा जाता है।
- विस्तार काली से तिस्ता नदी तक, लंबाई लगभग 800 किमी.। यह हिमालय का सबसे ऊँचा भाग है।
- प्रमुख चोटियाँ: एवरेस्ट, कंचनजंगा, मकालू, धौलागिरि, मानसलू, अन्नपूर्णा। मुख्य घाटी: काठमांडू।
- कोणधारी वन: देवदार, स्प्रूस, फर, चीड़। घाघरा (कर्णाली), गंडक और कोसी यहीं से निकलती हैं।
4. असम हिमालय
- विस्तार तिस्ता से दिहांग (ब्रह्मपुत्र) तक। इसका विस्तार सिक्किम के पूर्वी भाग, पश्चिम बंगाल के उत्तरी भाग, भूटान और अरुणाचल प्रदेश में है।
- प्रमुख श्रेणियाँ और चोटियाँ: नामचा बरवा, कुला कांगड़ी, चोमोल्हारी।
- प्रमुख नदी: ब्रह्मपुत्र।
पूर्वांचल की पहाड़ियाँ
- दिहांग महाखड्ड के बाद हिमालय दक्षिण की ओर तीखा मोड़ लेकर भारत की पूर्वी सीमा के साथ फैल जाता है। इन्हें पूर्वांचल पहाड़ियाँ कहते हैं।
- ये पहाड़ियाँ बलुआ पत्थर जैसी अवसादी शैलों से बनी हैं और घने जंगलों से ढकी हैं।
- इनमें पटकाई बूम (अरुणाचल प्रदेश), नागा (नागालैंड), मिजो (मिजोरम), मणिपुर और त्रिपुरा की पहाड़ियाँ शामिल हैं। नागालैंड का सारामती शिखर इस क्षेत्र की सबसे ऊँची चोटियों में गिना जाता है।
हिमालय की प्रमुख पर्वत चोटियाँ (Major Peaks of the Himalayas)
ऊपर महान हिमालय की चोटियाँ बताई जा चुकी हैं। यहाँ पूरे हिमालय-काराकोरम क्षेत्र की प्रमुख चोटियों का सार देखें –
| चोटी | ऊँचाई | अवस्थिति |
|---|---|---|
| माउंट एवरेस्ट | 8,848 मी. | नेपाल-तिब्बत |
| गॉडविन ऑस्टिन (K2) | 8,611 मी. | काराकोरम (पाक-अधिकृत गिलगित-बाल्टिस्तान) |
| कंचनजंगा | 8,598 मी. (विकि: 8,586) | भारत (सिक्किम)-नेपाल |
| मकालू | 8,481 मी. | नेपाल-तिब्बत |
| धौलागिरि | 8,172 मी. | नेपाल |
| नंगा पर्वत | 8,126 मी. | गिलगित-बाल्टिस्तान |
| अन्नपूर्णा | 8,078 मी. | नेपाल |
| नंदा देवी | 7,817 मी. | भारत (उत्तराखंड) |
| नामचा बरवा | 7,756 मी. (विकि: 7,782) | तिब्बत |
| केदारनाथ | 6,940 मी. के आसपास | भारत (उत्तराखंड) |
हिमालय के प्रमुख दर्रे (Major Passes of the Himalayas)
दर्रे पर्वतों के बीच के प्राकृतिक मार्ग हैं, जो प्राचीन समय से व्यापार, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और सामरिक आवागमन के काम आते रहे हैं।
1. जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के दर्रे
- काराकोरम दर्रा – लद्दाख और शिनजियांग (चीन) के बीच, काराकोरम श्रेणी में। ऊँचाई पुस्तकों में 5,654 मी. और विकिपीडिया में लगभग 5,540 मी. मिलती है। यह लेह से मध्य एशिया का पुराना व्यापार मार्ग था।
- जोजिला दर्रा – श्रीनगर को कारगिल और लेह से जोड़ता है।
- बनिहाल दर्रा – पीर पंजाल में, जम्मू को कश्मीर घाटी (श्रीनगर) से जोड़ता है। जवाहर सुरंग यहीं है।
- पीर पंजाल दर्रा – पीर पंजाल श्रेणी में, कश्मीर घाटी को पुंछ-राजौरी क्षेत्र से (मुगल मार्ग से) जोड़ता है।
- बुर्जिल दर्रा – श्रीनगर को गिलगित से जोड़ने वाला मार्ग।
2. हिमाचल प्रदेश के दर्रे
- शिपकी ला – किन्नौर में, भारत-तिब्बत सीमा पर। सतलुज नदी इसी के पास भारत में प्रवेश करती है।
- रोहतांग दर्रा – पीर पंजाल श्रेणी में, मनाली को लाहौल-स्पीति से जोड़ता है। इसके पास से व्यास (ब्यास) नदी निकलती है। अटल सुरंग अब इसे बाईपास करती है।
- बारालाचा ला – लाहौल-स्पीति में, जास्कर श्रेणी में। यह मनाली-लेह मार्ग पर है। चंद्रा और भागा नदियाँ इसके पास से निकलती हैं।
3. उत्तराखंड के दर्रे
- माना और नीति दर्रा – चमोली जिले में, तिब्बत की ओर जाने वाले पुराने मार्ग।
- लिपुलेख दर्रा – पिथौरागढ़ जिले में, उत्तराखंड को तिब्बत (तकलाकोट) से जोड़ता है। यह कैलाश-मानसरोवर यात्रा का एक मार्ग और भारत-चीन व्यापार मार्ग है।
4. सिक्किम के दर्रे
- नाथुला दर्रा – डोंगकिया श्रेणी में, सिक्किम को तिब्बत से जोड़ता है। यह भारत-चीन व्यापार का मार्ग है।
- जेलेप ला – सिक्किम से तिब्बत की चुम्बी घाटी जाने का मार्ग।
5. अरुणाचल प्रदेश और पूर्वोत्तर के दर्रे
- बुम ला / बोमडी ला – तवांग क्षेत्र से तिब्बत की ओर जाने वाले मार्ग।
- यांग्याप दर्रा – अरुणाचल-तिब्बत सीमा क्षेत्र का दर्रा।
- दिफू और पांगसाउ दर्रा – पटकाई श्रेणी में, अरुणाचल प्रदेश को म्यांमार से जोड़ते हैं।
हिमालय के प्रमुख हिमनद (Major Glaciers)
| हिमनद | लंबाई (पुस्तक) | अवस्थिति |
|---|---|---|
| सियाचिन | 76 किमी. (विकि: लगभग 70) | काराकोरम, लद्दाख (भारत) |
| बियाफो | 62 किमी. | काराकोरम (गिलगित-बाल्टिस्तान) |
| हिस्पर | 61 किमी. | काराकोरम (गिलगित-बाल्टिस्तान) |
| बाल्टोरो | 58 किमी. | काराकोरम (गिलगित-बाल्टिस्तान) |
| बातुरा | 58 किमी. | काराकोरम (गिलगित-बाल्टिस्तान) |
| बारा सिगरी | 27.7 किमी. | हिमाचल प्रदेश |
| गंगोत्री | 30 किमी. | उत्तराखंड |
| जेमू | 26 किमी. | सिक्किम (कंचनजंगा) |
| मिलाम | 19 किमी. | उत्तराखंड |
| छोटा सिगरी | 9 किमी. | हिमाचल प्रदेश |
| चोराबारी | 7 किमी. | उत्तराखंड (केदारनाथ के ऊपर) |
हिमालयी राज्य, जनसंख्या और जनगणना 2027
जनगणना 2011 के अनुसार प्रमुख हिमालयी राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों की स्थिति नीचे है। पर्वतीय क्षेत्र होने से यहाँ जनसंख्या घनत्व देश के औसत (382) से बहुत कम है।
| राज्य / UT | जनसंख्या 2011 | घनत्व (प्रति वर्ग किमी) | लिंगानुपात |
|---|---|---|---|
| उत्तराखंड | 1,00,86,292 | 189 | 963 |
| हिमाचल प्रदेश | 68,64,602 | 123 | 972 |
| मेघालय | 29,66,889 | 132 | 989 |
| मणिपुर | 25,70,390 | 122 | 992 |
| नागालैंड | 19,78,502 | 119 | 931 |
| अरुणाचल प्रदेश | 13,83,727 | 17 | 938 |
| मिजोरम | 10,97,206 | 52 | 976 |
| सिक्किम | 6,10,577 | 86 | 890 |
| लद्दाख (लगभग) | 2,74,000 | 2.8 | 853 |
जनगणना 2027 और हिमालय: जनगणना 2027 के लिए संदर्भ तिथि देश के अधिकांश भाग में 1 मार्च 2027 है, लेकिन लद्दाख और जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश तथा उत्तराखंड के बर्फीले (गैर-समकालिक) क्षेत्रों में यह 1 अक्टूबर 2026 रखी गई, क्योंकि सर्दी में बर्फबारी से वहाँ पहुँचना कठिन हो जाता है। सरकारी घोषणाओं के अनुसार लद्दाख और जम्मू-कश्मीर के ऐसे क्षेत्रों में जनसंख्या गणना 1 से 30 सितंबर 2026 के बीच कराई गई, उसके बाद 1 से 5 अक्टूबर तक संशोधन चरण रहा, और स्व-गणना की सुविधा अगस्त 2026 में दी गई। पूरी समय-सारणी और प्रश्नों के लिए हमारा विस्तृत लेख जनगणना 2027: पूरी जानकारी देखें। पर्वतीय क्षेत्रों की भौगोलिक कठिनाइयाँ ही यहाँ अलग समय-सारणी का कारण हैं। मैदानी क्षेत्रों के संदर्भ के लिए उत्तर का विशाल मैदान भी पढ़ें।
क्विज़: उत्तर भारत का पर्वतीय प्रदेश
प्रश्न 1. महान हिमालय और लघु हिमालय को कौन-सा भ्रंश अलग करता है?
- मुख्य सीमांत भ्रंश (MBT)
- मुख्य केंद्रीय भ्रंश (MCT)
- हिमालयी फ्रंटल भ्रंश
- इंडो-सांगपो सिवनी
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प्रश्न 2. लघु हिमालय के ढालों के घास के मैदान कश्मीर में क्या कहलाते हैं?
- बुग्याल
- मर्ग
- दून
- द्वार
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प्रश्न 3. हिमालय का सबसे नवीन और सबसे दक्षिणी भाग कौन-सा है?
- हिमाद्री
- हिमाचल
- शिवालिक
- ट्रांस हिमालय
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प्रश्न 4. बुर्रार्ड के वर्गीकरण में सतलुज और काली नदी के बीच का हिमालय कौन-सा है?
- पंजाब हिमालय
- कुमाऊँ हिमालय
- नेपाल हिमालय
- असम हिमालय
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प्रश्न 5. भारत के नियंत्रण वाला सबसे बड़ा हिमनद कौन-सा है?
- गंगोत्री
- सियाचिन
- बाल्टोरो
- जेमू
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निष्कर्ष
उत्तर भारत का पर्वतीय प्रदेश (हिमालय) भारत की जलवायु का नियंत्रक और जीवनदायिनी नदियों का उद्गम स्थल है। महान, लघु, शिवालिक और ट्रांस हिमालय, बुर्रार्ड का प्रादेशिक विभाजन, प्रमुख चोटियाँ, दर्रे और हिमनद परीक्षा की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। साथ ही, जनगणना 2027 में बर्फीले क्षेत्रों की अलग समय-सारणी इस भूगोल का व्यावहारिक उदाहरण है।
FAQs: उत्तर भारत का पर्वतीय प्रदेश
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