जाति जनगणना 2027: क्या है, इतिहास, प्रश्न 10 और पूरी जानकारी

🗓️ अंतिम अपडेट: 18 अक्टूबर 2026
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जाति जनगणना 2027 इस समय देश की सबसे चर्चित जनगणना-बहस है। जनगणना 2027 के दूसरे चरण में 1931 के बाद पहली बार अनुसूचित जाति और जनजाति के अलावा बाकी लोगों की जाति भी दर्ज होगी। यह लेख आसान भाषा में बताता है कि जाति जनगणना क्या है, इसका इतिहास क्या रहा, 2027 में यह कैसे होगी, इस पर बहस क्या है, और परीक्षा के लिए कौन-से तथ्य याद रखें।

1931आख़िरी बार सभी जातियों की गणना
30 अप्रैल 2025केंद्र का निर्णय
14 अगस्त 2026प्रश्न अधिसूचित
प्रश्न 10SC / ST / जाति
फरवरी 2027देश के अधिकांश भाग में गणना

जाति जनगणना क्या है?

जाति जनगणना का मतलब है जनगणना के दौरान हर व्यक्ति से उसकी जाति पूछकर उसे दर्ज करना और जातियों की संख्या के आधिकारिक आंकड़े तैयार करना। आज़ादी के बाद की हर जनगणना में केवल अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) दर्ज होती रही। अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) और बाकी जातियों की गिनती नहीं हुई। 2027 में यह पहली बार बदल रहा है।

जाति गणना का इतिहास

वर्ष घटना
1658-1664 मारवाड़ राज्य के कुछ ज़िलों में मुंहता नैणसी के नेतृत्व में जातिवार घरेलू सर्वे हुआ (विकिपीडिया के अनुसार, मुख्यतः कर-संबंधी उद्देश्य से)
1871-72 पहली विस्तृत जाति गणना (ब्रिटिश काल)
1881 से 1931 हर दशक की जनगणना में जाति दर्ज होती रही
1931 आख़िरी जाति गणना। इसमें 4,147 जातियाँ दर्ज हुईं
1951 आज़ाद भारत की पहली जनगणना में SC/ST के अलावा जाति की गिनती बंद की गई (सामाजिक विभाजन न बढ़ने देने के तर्क पर)
1961 केंद्र ने राज्यों को अपनी OBC सूची के लिए अपने स्तर पर सर्वे की छूट दी
1980 मंडल आयोग की रिपोर्ट ने OBC को 27% आरक्षण की सिफ़ारिश की। आयोग 1931 के आंकड़ों पर निर्भर रहा
2011 सामाजिक-आर्थिक एवं जाति जनगणना (SECC)। यह जनगणना अधिनियम के तहत नहीं थी और इसके जाति आंकड़े पूरी तरह जारी नहीं हुए
2023 बिहार का जाति आधारित सर्वेक्षण जारी (2 अक्टूबर 2023)
30 अप्रैल 2025 राजनीतिक मामलों की कैबिनेट समिति ने अगली जनगणना में जाति गणना शामिल करने का निर्णय लिया
14 अगस्त 2026 जनसंख्या गणना के 40 प्रश्न अधिसूचित, जिनमें प्रश्न 10 “SC/ST/जाति” है

जनगणना की पूरी समय-सारणी के लिए देखें जनगणना 2027: तिथि, चरण और पूरी जानकारी।

2027 की जनगणना में जाति कैसे दर्ज होगी?

जाति से जुड़ा सवाल दूसरे चरण, यानी जनसंख्या गणना में है। यह 40 प्रश्नों की सूची का प्रश्न 10 है, जिसका शीर्षक है “अनुसूचित जाति (SC) / अनुसूचित जनजाति (ST) / जाति”। 2011 में यही प्रश्न केवल SC/ST तक सीमित था।

  • प्रश्न 10 उन 13 प्रश्नों में से एक है जो 2011 की जनगणना में नहीं थे। 2011 की जनगणना में 29 प्रश्न थे।
  • जनसंख्या गणना देश के अधिकांश भाग में फरवरी 2027 (9 से 28 फरवरी) में होगी। लद्दाख और बर्फीले इलाकों में यह सितंबर 2026 में हो चुकी है, और यूपी, पंजाब, गोवा, उत्तराखंड में 1 दिसंबर 2026 से 4 जनवरी 2027 के बीच होगी।
  • रिपोर्टों के अनुसार SC/ST के अलावा बाकी लोगों की जाति खुले कॉलम में लिखी जाएगी। जाति की श्रेणियों का अंतिम ढाँचा और आंकड़े जारी होने का रूप आधिकारिक रूप से अभी स्पष्ट नहीं है।
  • आंकड़े कब आएँगे, इसकी कोई घोषणा नहीं हुई है।
पक्का नियम: जनगणना में दी गई जानकारी जनगणना अधिनियम, 1948 के तहत गोपनीय रहती है। जाति बताने के लिए कोई दस्तावेज़ या प्रमाण-पत्र माँगे जाने की कोई सूचना नहीं है। जाति के नाम पर पैसे या OTP माँगने वाला धोखेबाज़ है। सहायता के लिए हेल्पलाइन 1855।

SECC 2011 और जनगणना में फ़र्क

आधार जनगणना (Census) SECC 2011
कानून जनगणना अधिनियम, 1948 अधिनियम के तहत नहीं
जाति का प्रश्न 2027 में पहली बार जाति दर्ज होगी जाति शामिल थी
आंकड़ों का प्रकाशन जनगणना आंकड़े प्रकाशित होते हैं जाति आंकड़े पूरी तरह जारी नहीं हुए
गोपनीयता धारा 15 के तहत व्यक्तिगत रिकॉर्ड गोपनीय अलग व्यवस्था

बिहार जाति सर्वेक्षण 2023: एक उदाहरण

बिहार ने 2 अक्टूबर 2023 को अपना जाति आधारित सर्वेक्षण जारी किया। राज्य की कुल जनसंख्या लगभग 13.07 करोड़ दर्ज हुई।

वर्ग प्रतिशत
अति पिछड़ा वर्ग (EBC) 36%
पिछड़ा वर्ग (OBC) 27.13%
अनुसूचित जाति (SC) 19.65%
सामान्य (अनारक्षित) 15.52%
अनुसूचित जनजाति (ST) 1.68%
EBC और OBC मिलाकर लगभग 63% हैं। यादव सबसे बड़ी जाति के रूप में 14.27% दर्ज हुए। कर्नाटक और तेलंगाना ने भी अपने-अपने जाति सर्वेक्षण कराए हैं।

बहस: समर्थन और आपत्तियाँ

समर्थन में तर्क आपत्ति / चिंताएँ
सही आंकड़ों से आरक्षण और कल्याणकारी योजनाएँ बेहतर बन सकती हैं।
मंडल आयोग जैसे फ़ैसले 1931 के पुराने आंकड़ों पर टिके रहे, जबकि अब नए आंकड़े मिलेंगे।
कमज़ोर समुदायों की वास्तविक स्थिति सामने आएगी।
जातिगत पहचान और राजनीति के और गहरा होने की आशंका।
खुले कॉलम में जाति लिखने से एक ही जाति के कई नाम और गलतियाँ हो सकती हैं।
आंकड़ों के उपयोग और प्रकाशन को लेकर स्पष्टता की माँग।

राज्यों की माँगें (सितंबर 2026)

  • तमिलनाडु विधानसभा: सितंबर 2026 में पारित प्रस्ताव में केंद्र से माँग की गई कि पिछड़ा वर्ग, अति पिछड़ा वर्ग और विमुक्त समुदायों की जातियों की सूची पहले से जनगणना पोर्टल में डाली जाए और “खुले कॉलम” की पद्धति छोड़ी जाए।
  • तेलंगाना विधानसभा: 11 सितंबर 2026 को पारित प्रस्ताव में माँग की गई कि प्रश्न 10 में SC/ST के साथ OBC की पहचान की भी व्यवस्था हो, और राज्य व केंद्र की पिछड़ा वर्ग सूचियाँ डिजिटल पोर्टल पर पहले से अपलोड हों।
ये प्रस्ताव राज्य विधानसभाओं की माँगें हैं। आधिकारिक अधिसूचना में बदलाव होता है या नहीं, यह अभी स्पष्ट नहीं है। इसलिए तारीख या ढाँचे को अंतिम मानने से पहले आधिकारिक घोषणा देखें।

परीक्षा उपयोगी तथ्य

  • आख़िरी बार सभी जातियों की गणना: 1931 (4,147 जातियाँ)।
  • आज़ादी के बाद जाति गणना रोकी गई: 1951, नेहरू सरकार के समय।
  • कैबिनेट समिति का निर्णय: 30 अप्रैल 2025।
  • जनसंख्या गणना के प्रश्न अधिसूचित: 14 अगस्त 2026। जाति से जुड़ा प्रश्न: 10।
  • SECC 2011 जनगणना अधिनियम के तहत नहीं था।
  • बिहार जाति सर्वेक्षण: 2 अक्टूबर 2023। EBC 36%, OBC 27.13%।
  • मंडल आयोग ने OBC के लिए 27% आरक्षण की सिफ़ारिश की।

क्विज़: जाति जनगणना 2027

प्रश्न 1. देश में आख़िरी बार सभी जातियों की गणना किस वर्ष हुई?

  1. 1941
  2. 1931
  3. 1951
  4. 2011
✅ उत्तर देखें
(b) 1931

प्रश्न 2. जनगणना 2027 में जाति से जुड़ा प्रश्न किस क्रम पर है?

  1. 5
  2. 10
  3. 20
  4. 30
✅ उत्तर देखें
(b) 10

प्रश्न 3. जाति गणना शामिल करने का निर्णय किस तारीख को हुआ?

  1. 30 अप्रैल 2025
  2. 14 अगस्त 2026
  3. 1 मार्च 2027
  4. 2 अक्टूबर 2023
✅ उत्तर देखें
(a) 30 अप्रैल 2025

प्रश्न 4. बिहार जाति सर्वेक्षण में EBC का प्रतिशत कितना था?

  1. 15.52%
  2. 19.65%
  3. 27.13%
  4. 36%
✅ उत्तर देखें
(d) 36%

प्रश्न 5. SECC 2011 किस अधिनियम के तहत हुआ था?

  1. जनगणना अधिनियम 1948
  2. किसी अधिनियम के तहत नहीं
  3. RTI अधिनियम
  4. IT अधिनियम
✅ उत्तर देखें
(b) जनगणना अधिनियम के तहत नहीं

निष्कर्ष

जाति जनगणना 2027 भारत की जनगणना के इतिहास में 1931 के बाद का सबसे बड़ा बदलाव है। प्रश्न 10 में अब SC/ST के साथ जाति भी दर्ज होगी। इसके समर्थक इसे नीतियों को सही आंकड़े देने वाला कदम मानते हैं, जबकि आलोचक इसके तरीके और राजनीतिक असर पर सवाल उठाते हैं। आंकड़ों के प्रकाशन और अंतिम ढाँचे पर आधिकारिक स्पष्टता का इंतज़ार है।

FAQs: जाति जनगणना 2027

जाति जनगणना क्या है?
जनगणना के दौरान हर व्यक्ति की जाति दर्ज करना और जातिवार संख्या के आंकड़े तैयार करना।
जाति जनगणना का निर्णय कब हुआ?
राजनीतिक मामलों की कैबिनेट समिति ने 30 अप्रैल 2025 को अगली जनगणना में जाति गणना शामिल करने का निर्णय लिया।
आख़िरी जाति जनगणना कब हुई थी?
1931 में। उसके बाद आज़ाद भारत की जनगणनाओं में केवल SC और ST की गिनती हुई।
जनगणना 2027 में जाति का प्रश्न कौन-सा है?
प्रश्न 10, जिसका शीर्षक “अनुसूचित जाति / अनुसूचित जनजाति / जाति” है।
जाति कैसे दर्ज की जाएगी?
रिपोर्टों के अनुसार SC/ST के अलावा बाकी लोगों की जाति खुले कॉलम में लिखी जाएगी। अंतिम ढाँचा आधिकारिक रूप से और स्पष्ट होना बाकी है।
क्या जाति बताने के लिए प्रमाण-पत्र देना होगा?
ऐसी कोई सूचना उपलब्ध नहीं है। जनगणना में स्वयं बताई गई जानकारी दर्ज होती है।
जाति जनगणना और SECC 2011 में क्या अंतर है?
जनगणना, जनगणना अधिनियम 1948 के तहत होती है और आंकड़े गोपनीय रखे जाते हैं। SECC 2011 अधिनियम के तहत नहीं था और उसके जाति आंकड़े पूरी तरह जारी नहीं हुए।
जाति जनगणना के आंकड़े कब आएँगे?
अभी इसकी कोई आधिकारिक तारीख घोषित नहीं हुई है।
बिहार के जाति सर्वेक्षण में क्या मिला था?
2 अक्टूबर 2023 को जारी आंकड़ों में EBC 36%, OBC 27.13%, SC 19.65%, सामान्य 15.52% और ST 1.68% थे। यादव 14.27% थे।
तमिलनाडु और तेलंगाना की विधानसभाओं ने क्या माँगा?
सितंबर 2026 में दोनों ने प्रस्ताव पारित किए। तमिलनाडु ने पिछड़े वर्गों की सूची पोर्टल में पहले से डालने और खुले कॉलम की पद्धति छोड़ने की माँग की, तेलंगाना ने प्रश्न 10 में OBC की पहचान की व्यवस्था माँगी।

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केवल कृष्ण घोड़ेला (Keval Krishan Ghorela)
लेखक परिचय: केवल कृष्ण घोड़ेला
एम.ए., बी.एड. (नेट हिंदी), कॉलेज व्याख्याता, श्रीगंगानगर (राजस्थान)

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