भारतीय मरुस्थल (थार मरुस्थल): भूगोल, विशेषताएँ, वर्गीकरण और जनसंख्या [Notes]

🗓️ अंतिम अपडेट: 17 अक्टूबर 2026

भारतीय उपमहाद्वीप के पश्चिमी छोर पर स्थित थार मरुस्थल (Thar Desert in Hindi) या भारतीय मरुस्थल (Indian Desert Geography) भूगोल का एक बेहद महत्वपूर्ण और परीक्षोपयोगी विषय है। UGC NET Geography, RPSC 1st Grade, 2nd Grade, REET, UPSC और अन्य राज्य स्तरीय प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों के लिए इस टॉपिक से हर साल प्रश्न पूछे जाते हैं। यदि आप थार मरुस्थल का विस्तार और स्थिति, भारतीय मरुस्थल की विशेषताएँ, बरखान क्या है और थार मरुस्थल की नदियाँ जैसे विषयों की तलाश में हैं, तो ये नोट्स आपके लिए उपयोगी हैं। मेसोजोइक युग में कभी समुद्र का हिस्सा रहा यह भू-भाग आज जनसंख्या घनत्व के मामले में दुनिया का सबसे घना मरुस्थल है। इस लेख में हम इसकी भौगोलिक स्थिति, वर्गीकरण, जलवायु, जनजीवन और जनगणना से जुड़े आंकड़ों को क्रम से समझेंगे।

~2 लाख वर्ग किमीकुल विस्तार
85% भारत मेंशेष 15% पाकिस्तान में
~62% राजस्थान मेंभारतीय भाग का
640 × 300 किमीलंबाई × चौड़ाई
लूनीप्रमुख नदी
150 मिमी से कमपश्चिमी भाग में वर्षा

🎯 मुख्य बिंदु एक नज़र में (Quick Overview)

बिंदु विवरण
प्रमुख नाम थार मरुस्थल / भारतीय मरुस्थल
भौगोलिक स्थिति अरावली पहाड़ी के पश्चिम में स्थित शुष्क भू-भाग
कुल विस्तार लगभग 2 लाख वर्ग किमी (भारत व पाकिस्तान में)
देशवार हिस्सा भारत में 85% तथा पाकिस्तान में 15%
भारतीय राज्य राजस्थान (लगभग 62%), गुजरात, पंजाब और हरियाणा
भौतिक आकार लंबाई 640 किमी और चौड़ाई 300 किमी
जलवायु उष्ण मरुस्थलीय (अत्यधिक वाष्पीकरण, बहुत कम वर्षा)
उपयोगी परीक्षाएँ UPSC, RPSC, REET, TGT, PGT एवं अन्य राज्य स्तरीय परीक्षाएँ

1. भारतीय मरुस्थल का उद्गम और भौगोलिक पृष्ठभूमि

भारतीय मरुस्थल का इतिहास करोड़ों वर्ष पुराना है। यह क्षेत्र मेसोजोइक युग में समुद्र का हिस्सा हुआ करता था। भूगर्भिकीय दृष्टि से इसके नीचे प्री-कैंब्रियन युग की अत्यंत प्राचीन चट्टानें हैं, जिन पर अवसादी चट्टानों और नदियों द्वारा लाए गए निक्षेपों की परत जमी है। इन्हीं पर हवा से लाई गई रेत और बालू के टिब्बों की मोटी परत फैली है, इसलिए इसे बालू रेत का तरंगित मैदान भी कहा जाता है।

थार मरुस्थल का कुल विस्तार लगभग 2 लाख वर्ग किलोमीटर है, जिसका 85 प्रतिशत हिस्सा भारत में और 15 प्रतिशत हिस्सा पाकिस्तान में है। भारतीय भाग का लगभग 62 प्रतिशत अकेले राजस्थान में फैला है। भारत में इसका विस्तार मुख्य रूप से चार राज्यों राजस्थान, गुजरात, पंजाब और हरियाणा में मिलता है। क्षेत्रफल के आधार पर यह विश्व का 17वाँ सबसे बड़ा मरुस्थल है (विकिपीडिया की मरुस्थल-सूची के अनुसार) और जनसंख्या घनत्व के हिसाब से दुनिया का सबसे घना मरुस्थल है।

📌 ध्यान दें: परीक्षा-पुस्तकों में थार का क्षेत्रफल लगभग 2 लाख वर्ग किमी (भारत 85%, पाकिस्तान 15%) और राजस्थान का हिस्सा 60% से अधिक (प्रायः 62%) बताया जाता है। विकिपीडिया में पूरे मरुस्थल का क्षेत्रफल 2,64,091 वर्ग किमी दिया है, जिसमें भारतीय भाग लगभग 1,95,091 वर्ग किमी (करीब तीन-चौथाई) है। परीक्षा में पाठ्य-पुस्तक वाले आंकड़े (2 लाख, 85%, 62%) ही उत्तर मानें।

2. जलवायु, नदियाँ और पर्यावरणीय विशेषताएँ

  • जलवायु और तापमान: यह एक उष्ण मरुस्थल है और जलवायु अत्यंत शुष्क है। गर्मियों में तापमान 50°C के आसपास पहुँच जाता है, जबकि सर्दियों में रातें इतनी ठंडी हो जाती हैं कि तापमान शून्य के आसपास या उससे नीचे भी चला जाता है। गर्मियों में चलने वाली गर्म हवाओं को ‘लू’ कहा जाता है।
  • वर्षा और वाष्पीकरण: पश्चिमी भाग में वार्षिक वर्षा 150 मिलीमीटर से भी कम होती है और वाष्पीकरण बहुत अधिक होता है।
  • अपवाह तंत्र (नदियाँ): इस क्षेत्र की सबसे बड़ी नदी ‘लूनी’ है, जो अरावली से निकलकर कच्छ के रण में विलीन हो जाती है। यहाँ की अधिकांश नदियाँ अल्पकालिक हैं, केवल वर्षा ऋतु में दिखती हैं और मरुस्थल में ही लुप्त हो जाती हैं। घग्गर जैसी नदी भी इसी क्षेत्र में विलुप्त होती है।
  • बालुका स्तूप और पवन अपरदन: हवा के कारण रेत एक स्थान से दूसरे स्थान पर खिसकती रहती है और तरह-तरह के टीले बनते हैं। रेत से बने इन टीलों को ‘बालुका स्तूप’ (स्थानीय भाषा में ‘धोरे’) कहा जाता है।

विशेष नोट – बरखान क्या है? बरखान अर्द्धचन्द्राकार बालुका स्तूप होते हैं। इनका पवनामुखी ढाल मंद व उत्तल तथा पवनाविमुखी ढाल तीव्र होता है। ये सामान्यतः 10 से 30 मीटर ऊँचे तथा 100 से 200 मीटर चौड़े होते हैं। मरुस्थलीकरण के लिए सर्वाधिक उत्तरदायी बालुका स्तूप बरखान ही माने जाते हैं।

बालुका स्तूप का प्रकार पहचान
बरखान अर्द्धचन्द्राकार, पवनाभिमुखी ढाल मंद और विमुखी ढाल तीव्र; सबसे गतिशील
अनुदैर्ध्य (Longitudinal) हवा की दिशा के समानांतर लंबी रेत की पट्टियाँ
अनुप्रस्थ (Transverse) हवा की दिशा के लंबवत फैली रेत की श्रेणियाँ
परवलयाकार (Parabolic) U आकार; वनस्पति से आंशिक रूप से स्थिर हुए टीले

3. थार मरुस्थल का वर्गीकरण

थार मरुस्थल को मुख्य रूप से दो आधारों पर बाँटा गया है:

  • वर्षा के आधार पर वर्गीकरण
  • बालू एवं चट्टान के आधार पर वर्गीकरण

क. वर्षा के आधार पर वर्गीकरण

  1. शुष्क क्षेत्र: जहाँ वार्षिक वर्षा 25 सेमी से कम होती है। इस क्षेत्र का क्षेत्रफल लगभग 1 लाख वर्ग किमी है।
  2. अर्द्धशुष्क क्षेत्र: जहाँ वार्षिक वर्षा 25 से 50 सेमी के बीच होती है। इस क्षेत्र का क्षेत्रफल लगभग 75 हजार वर्ग किमी है।

ख. बालू एवं चट्टान के आधार पर वर्गीकरण

प्रकार अर्थ
इर्ग जहाँ संपूर्ण रेतीला मरुस्थल पाया जाता है
हम्मादा उबड़-खाबड़ चट्टानी क्षेत्र, जहाँ केवल चट्टानें मिलती हैं
रेग जहाँ रेतीला और चट्टानी दोनों प्रकार के क्षेत्र मिलते हैं
लघु मरुस्थल अर्द्धशुष्क मरुस्थल वाला क्षेत्र, जो कृषि के लिए उपयुक्त माना जाता है

4. जनजीवन, वनस्पति और आर्थिक गतिविधियाँ

  • जनसंख्या और आवास: विषम जलवायु के कारण यहाँ जनसंख्या कम है और अधिकांश आबादी गाँवों में बिखरी हुई है। जोधपुर, बीकानेर और जैसलमेर इस क्षेत्र के प्रमुख शहर हैं।
  • वनस्पति: मिट्टी कम उपजाऊ है और वनस्पति बहुत कम मिलती है। मुख्यतः उष्णकटिबंधीय शुष्क कँटीली झाड़ियाँ, खेजड़ी जैसे वृक्ष और औषधीय जड़ी-बूटियाँ ही पनपती हैं।
  • व्यवसाय और पशुपालन: मुख्य व्यवसाय पशुपालन है। यहाँ गाय, भैंस, बकरी, भेड़ और गधे पाले जाते हैं, तथा परिवहन और आजीविका के लिए विशेष रूप से ऊँट पाला जाता है।
  • सिंचाई और नई संभावनाएँ: इंदिरा गांधी नहर परियोजना ने मरुस्थल के कई हिस्सों में सिंचाई पहुँचाई है। साथ ही जोधपुर का भादला सोलर पार्क जैसे सौर ऊर्जा संयंत्र इस क्षेत्र को नई आर्थिक पहचान दे रहे हैं।
  • मरुस्थलीकरण की समस्या: थार का विस्तार बढ़ने से मरुस्थलीकरण आज एक गंभीर पर्यावरणीय चुनौती बन गया है।

5. जनगणना की दृष्टि से थार: दुनिया का सबसे घना मरुस्थल

थार मरुस्थल का औसत जनसंख्या घनत्व लगभग 83 व्यक्ति प्रति वर्ग किमी माना जाता है, जो किसी भी अन्य मरुस्थल से कहीं अधिक है। फिर भी यह भारत के औसत घनत्व (जनगणना 2011 में 382 व्यक्ति प्रति वर्ग किमी) से बहुत कम है। राजस्थान जनसंख्या में 2011 में देश का 8वाँ राज्य था और उसका घनत्व लगभग 200 व्यक्ति प्रति वर्ग किमी था। राजस्थान क्षेत्रफल में देश का सबसे बड़ा राज्य है।

मरुस्थलीय ज़िला घनत्व (जनगणना 2011, व्यक्ति/वर्ग किमी)
जैसलमेर 17 (राजस्थान में सबसे कम)
बीकानेर 78
बाड़मेर 92
जोधपुर 161
श्रीगंगानगर 179
ये ज़िले-स्तरीय आंकड़े 2011 की जनगणना और उस समय की ज़िला-सीमाओं के हैं (बाद में कुछ ज़िले बँटे हैं)। जनगणना 2027 के बाद इनमें बदलाव दिखेगा। उसकी तिथियाँ, चरण और प्रश्न हमारे विस्तृत लेख में देखें। इस क्षेत्र का जल-वितरण कैसा है, यह जानने के लिए प्रायद्वीपीय पठार और उत्तर का विशाल मैदान से तुलना भी उपयोगी रहेगी।

💡 परीक्षार्थियों के लिए विशेष टिप्स (Exam Tips)

  • विश्व में स्थान: थार क्षेत्रफल में विश्व का 17वाँ सबसे बड़ा मरुस्थल है, लेकिन जनसंख्या घनत्व के मामले में सबसे घना मरुस्थल है।
  • मुख्य नदी: इस मरुस्थल की प्रमुख नदी ‘लूनी’ है, जो अंततः कच्छ के रण में विलुप्त हो जाती है।
  • बरखान की विशेषता: मरुस्थलीकरण के लिए सबसे अधिक उत्तरदायी बालुका स्तूप ‘बरखान’ (अर्द्धचन्द्राकार स्तूप) है।
  • भौगोलिक विस्तार: भारतीय भाग का लगभग 62% हिस्सा राजस्थान में आता है।

क्विज़: भारतीय मरुस्थल

प्रश्न 1. थार मरुस्थल की प्रमुख नदी कौन-सी है?

  1. घग्गर
  2. लूनी
  3. चंबल
  4. माही
✅ उत्तर देखें
(b) लूनी

प्रश्न 2. मरुस्थलीकरण के लिए सबसे अधिक उत्तरदायी बालुका स्तूप कौन-सा है?

  1. बरखान
  2. परवलयाकार
  3. अनुप्रस्थ
  4. तारा आकार
✅ उत्तर देखें
(a) बरखान

प्रश्न 3. पूरी तरह रेतीले मरुस्थल को क्या कहा जाता है?

  1. हम्मादा
  2. रेग
  3. इर्ग
  4. लघु मरुस्थल
✅ उत्तर देखें
(c) इर्ग

प्रश्न 4. जनगणना 2011 में राजस्थान का कौन-सा मरुस्थलीय ज़िला सबसे कम घनत्व वाला था?

  1. बीकानेर
  2. बाड़मेर
  3. जोधपुर
  4. जैसलमेर
✅ उत्तर देखें
(d) जैसलमेर, लगभग 17 व्यक्ति प्रति वर्ग किमी

प्रश्न 5. थार का कितना प्रतिशत भाग भारत में है?

  1. 15%
  2. 62%
  3. 85%
  4. 50%
✅ उत्तर देखें
(c) 85%

निष्कर्ष

भारतीय मरुस्थल (थार मरुस्थल) केवल एक रेतीला और बंजर भू-भाग नहीं है, बल्कि यह अपनी समृद्ध संस्कृति, जैव-विविधता और संघर्षपूर्ण जीवनशैली का अनूठा प्रतीक है। भूगर्भीय इतिहास से लेकर वर्तमान पर्यावरणीय चुनौतियों तक, यह क्षेत्र भूगोल के विद्यार्थियों और शोधकर्ताओं के लिए हमेशा महत्वपूर्ण अध्ययन का केंद्र रहा है। सिंचाई, सौर ऊर्जा और प्रशासनिक प्रयासों से इस क्षेत्र में सतत विकास की संभावनाएँ लगातार तलाशी जा रही हैं।

FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न)

Q1. थार मरुस्थल का कुल कितना प्रतिशत भाग भारत में स्थित है?
थार मरुस्थल का लगभग 85 प्रतिशत भाग भारत में (शेष 15% पाकिस्तान में) स्थित है। भारतीय भाग का लगभग 62% राजस्थान राज्य में आता है।
Q2. बरखान किसे कहते हैं और यह क्यों महत्वपूर्ण है?
बरखान अर्द्धचन्द्राकार बालुका स्तूप होते हैं। इनका पवनामुखी ढाल मंद और पवनाविमुखी ढाल तीव्र होता है। ये मरुस्थलीकरण की प्रक्रिया के लिए सबसे अधिक उत्तरदायी माने जाते हैं।
Q3. भारतीय मरुस्थल की सबसे प्रमुख नदी कौन-सी है?
इस क्षेत्र की सबसे बड़ी और प्रमुख नदी ‘लूनी’ है, जो अल्पकालिक है, अरावली से निकलती है और कच्छ के रण में विलीन हो जाती है।
Q4. हम्मादा और इर्ग से क्या तात्पर्य है?
जहाँ संपूर्ण रेतीला मरुस्थल पाया जाता है उसे ‘इर्ग’ कहते हैं, जबकि उबड़-खाबड़ चट्टानी क्षेत्र को ‘हम्मादा’ कहा जाता है। रेतीले और चट्टानी मिश्रित क्षेत्र को ‘रेग’ कहते हैं।
Q5. थार मरुस्थल की उत्पत्ति के संबंध में इसका भूगर्भीय इतिहास क्या है?
यह क्षेत्र मेसोजोइक युग में समुद्र का हिस्सा था। इसके नीचे प्री-कैंब्रियन युग की प्राचीन चट्टानें हैं, जिन पर अवसादों और रेत की मोटी परत जमी है।
Q6. थार को दुनिया का सबसे घना मरुस्थल क्यों कहा जाता है?
थार का औसत जनसंख्या घनत्व लगभग 83 व्यक्ति प्रति वर्ग किमी है, जो अन्य बड़े मरुस्थलों से कहीं अधिक है। इसी कारण इसे जनसंख्या घनत्व के हिसाब से दुनिया का सबसे घना मरुस्थल कहा जाता है।
Q7. थार मरुस्थल का सबसे कम घनत्व वाला ज़िला कौन-सा है?
जनगणना 2011 के अनुसार राजस्थान में सबसे कम जनसंख्या घनत्व जैसलमेर ज़िले का था, लगभग 17 व्यक्ति प्रति वर्ग किमी। नए आंकड़े जनगणना 2027 के बाद आएँगे।
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लेखक परिचय: केवल कृष्ण घोड़ेला
एम.ए., बी.एड. (नेट हिंदी), कॉलेज व्याख्याता, श्रीगंगानगर (राजस्थान)

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