भारत के तटीय मैदान क्या हैं? (परिचय एवं मुख्य बिंदु)
भारतीय प्रायद्वीप के दोनों किनारों पर समुद्र तट और पर्वत श्रेणियों के मध्य फैले विस्तृत भू-भाग को भारत के तटीय मैदान (Coastal Plains of India) कहा जाता है। यदि आप भारत के तटीय मैदानों की विशेषताएँ, पश्चिमी तटीय मैदान और पूर्वी तटीय मैदान में अंतर, कोंकण, मालाबार, उत्कल और कोरोमंडल तट तथा इससे जुड़े हर महत्वपूर्ण भौगोलिक पहलू को सरल और स्पष्ट भाषा में समझना चाहते हैं, तो यह विस्तृत मार्गदर्शिका आपके लिए अत्यंत उपयोगी है। प्रतियोगी परीक्षाओं (जैसे UPSC, State PSC, SSC) और अकादमिक स्तर पर भारत के तटीय मैदानों के उपविभाग, बंदरगाहों, लैगून झीलों और कृषि-आर्थिक महत्व से जुड़े प्रश्न बहुतायत में पूछे जाते हैं। आइए इस लेख में गुजरात के कच्छ से लेकर स्वर्ण रेखा नदी और कन्याकुमारी तक फैले इन तटीय मैदानों के निर्माण, उनकी श्रेणियों और संपूर्ण भौगोलिक स्वरूप को विस्तार से समझते हैं।
इस लेख में हम क्या जानेंगे? (Table of Contents)
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भारत के तटीय मैदानों की परिभाषा और निर्माण की प्रक्रिया
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पश्चिमी तटीय मैदान का विस्तार, उपविभाग और प्रमुख बंदरगाह
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पूर्वी तटीय मैदान, डेल्टा निर्माण और प्रमुख तट (कोरोमंडल, उत्कल आदि)
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पश्चिमी और पूर्वी तटीय मैदानों में मुख्य अंतर
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परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
1. भारत के तटीय मैदानों की सामान्य विशेषताएँ
भारत के तटीय मैदानी भाग गुजरात के कच्छ से लेकर स्वर्ण रेखा नदी तक लगभग 6100 किलोमीटर की लंबाई में विस्तृत हैं. भारतीय तटीय मैदान का विस्तार प्रायद्वीपीय पर्वत श्रेणी एवं समुद्र तट के मध्य पाया जाता है। प्रायद्वीपीय पठार के किनारों पर संकीर्ण तटीय पट्टियों का विस्तार पश्चिम में अरब सागर से लेकर पूर्व में बंगाल की खाड़ी तक लगभग 6000 किलोमीटर की दूरी में है.
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तटीय मैदान की चौड़ाई पश्चिमी तट की अपेक्षा पूर्वी तट पर अधिक है।
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इनका निर्माण सागरीय तरंगों द्वारा अपरदन व निक्षेपण एवं पठारी नदियों द्वारा लाए गए अवसादों के जमाव से हुआ है।
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तटीय मैदान को मुख्य रूप से दो भागों में विभाजित किया जाता है: (1) पश्चिमी तटीय मैदान और (2) पूर्वी तटीय मैदान।
2. पश्चिमी तटीय मैदान (Western Coastal Plains)
पश्चिमी तटीय मैदान सूरत (गुजरात) से कन्याकुमारी (तमिलनाडु) के तटीय क्षेत्र में विस्तृत है। पश्चिमी घाट तथा अरब सागर के तट के बीच निर्मित मैदान को पश्चिमी तटीय मैदान कहा जाता है।
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यह एक संकरी जलोढ़ पट्टी है जिसमें बीच-बीच में पहाड़ी भू-भाग है, जो गुजरात राज्य में सर्वाधिक चौड़ा है।
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पश्चिमी तटीय मैदान की औसत चौड़ाई 64 किलोमीटर है।
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इस तट का उत्तरी भाग ‘कोंकण तट’, मध्य भाग ‘कन्नड़ तट’ और दक्षिणी भाग ‘मालाबार तट’ के नाम से जाना जाता है।
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कच्छ से कन्याकुमारी तक फैला पश्चिमी तटीय मैदान पथरीला और कटा-फटा होने के कारण जुताई कृषि के लिए उपयुक्त नहीं है, लेकिन प्राकृतिक बंदरगाहों के विकास के लिए अत्यंत अनुकूल है। यहाँ कई अनूप (लैगून) झीलें पाई जाती हैं।
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पश्चिमी तटीय मैदान की नदियाँ अपने मुहाने पर डेल्टा न बनाकर एश्चुअरी (Estuary) का निर्माण करती हैं।
पश्चिमी तटीय मैदान के प्रमुख उपविभाग:
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गुजरात का तट (काठियावाड़ का तट): इसका विस्तार कच्छ से सूरत तक है। यह क्षेत्र देश में सर्वाधिक नमक उत्पादन, रासायनिक बंदरगाह, निजी क्षेत्र के मुंदरा पोर्ट, जामनगर रिफाइनरी तथा ज्वारीय बंदरगाह कांडला के लिए प्रसिद्ध है। इसे कच्छ, काठियावाड़ और काकरापार तटों में बाँटा जाता है।
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कोंकण तट: दमन से गोवा तक महाराष्ट्र और गोवा के तटीय क्षेत्र को कोंकण तट कहते हैं। यह आम के उत्पादन, समुद्री पर्यटन, मुंबई बंदरगाह और देश के पहले पूर्णतः यांत्रिकृत बंदरगाह (न्हावा शेवा/JNPT) के लिए प्रसिद्ध है।
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कन्नड़ तट (कनारा तट): गोवा से न्यू मंगलोर तक के कर्नाटक तटीय क्षेत्र को कन्नड़ तट कहते हैं। यहाँ का प्रमुख बंदरगाह न्यू मंगलोर है, जिसे ‘भारत का कॉफी बंदरगाह’ भी कहा जाता है।
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मालाबार तट: न्यू मंगलोर से कन्याकुमारी तक विस्तृत इस तट का अधिकांश भाग केरल में आता है, इसलिए इसे ‘केरल तट’ भी कहते हैं। यहाँ अनेकों लैगून झीलें जिन्हें ‘कयाल’ कहा जाता है (जैसे वेम्बनाडु, पुन्नामदा और अष्टमुडी झील) पाई जाती हैं। यह तट मसालों (काली मिर्च, इलायची) और नारियल के उत्पादन के लिए प्रसिद्ध है।
3. पूर्वी तटीय मैदान (Eastern Coastal Plains)
पूर्वी तटीय मैदान का विस्तार पश्चिम बंगाल (हुगली नदी के मुहाने) से लेकर दक्षिण में कन्याकुमारी तक है। पूर्वी घाट तथा बंगाल की खाड़ी के तट के बीच निर्मित यह मैदान पश्चिमी तटीय मैदानों की तुलना में अधिक चौड़ा और समतल है।
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पूर्वी तटीय मैदान की चौड़ाई 100 से 150 किलोमीटर है, और इसकी सर्वाधिक चौड़ाई तमिलनाडु में मिलती है।
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बंगाल की खाड़ी के समानांतर फैला यह मैदानी प्रदेश डेल्टा निर्मित होने के कारण खेती के लिए अत्यधिक उपयुक्त है, लेकिन सपाट तट होने के कारण यहाँ प्राकृतिक बंदरगाहों की कमी है।
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महानदी, गोदावरी, कृष्णा और कावेरी जैसी नदियाँ अपने मुहाने पर विशाल डेल्टा का निर्माण करती हैं।
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यहाँ कई प्रसिद्ध लैगून झीलें हैं, जैसे ओडिशा की चिल्का झील (भारत की सबसे बड़ी खारे पानी की झील) और आंध्र प्रदेश की पुलिकट झील।
पूर्वी तटीय मैदान के प्रमुख उपविभाग:
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उत्कल तट: स्वर्ण रेखा नदी से महानदी के मध्य (मुख्यतः ओडिशा में) फैला यह तट पाराद्वीप बंदरगाह के लिए प्रसिद्ध है।
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उत्तरी सरकार तट (या कलिंग तट): महानदी से कृष्णा नदी के मध्य (आंध्र प्रदेश और ओडिशा) विस्तृत है। इस तट पर आंध्र प्रदेश में श्रीहरिकोटा द्वीप स्थित है।
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काकीनाडा का तट: सीमान्ध्र क्षेत्र के इस तट पर विशाखापट्टनम बंदरगाह स्थित है, जो देश का सबसे गहरा और एकमात्र स्थल-आवद्ध (Landlocked) बंदरगाह है।
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कोरोमंडल तट: कृष्णा नदी के डेल्टा से लेकर कन्याकुमारी (तमिलनाडु) तक के तट को कोरोमंडल तट कहते हैं। यह ताड़ के वृक्षों, चेन्नई कृत्रिम बंदरगाह और उत्तर-पूर्वी मानसून (शीतकालीन मानसून) से वर्षा प्राप्त करने के लिए विशेष रूप से जाना जाता है।
4. FAQs (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न)
5. निष्कर्ष (Conclusion)
भारतीय प्रायद्वीप के दोनों छोरों पर फैले भारत के तटीय मैदान देश की आर्थिक, व्यापारिक और सामरिक रीढ़ की हड्डी हैं। पश्चिम में प्राकृतिक बंदरगाहों, कयालों और पर्यटन की प्रचुरता तथा पूर्व में उपजाऊ डेल्टाई मैदानों, कृषि उत्पादकता और झीलों का यह अनूठा संगम भारत की भौगोलिक विविधता को पूर्ण करता है। प्रतियोगी परीक्षाओं और अकादमिक अध्ययन की दृष्टि से इन तटीय मैदानों, उनके उपविभागों, बंदरगाहों तथा जलवायुगत विशेषताओं का सूक्ष्म अध्ययन करना हर अभ्यर्थी के लिए अत्यंत अनिवार्य और लाभदायक है।
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