उत्तर भारत का पर्वतीय प्रदेश(Northern Mountain Region): भारत का उत्तरी पर्वतीय प्रदेश भौतिक दृष्टि से विविध और विशिष्ट है। यह क्षेत्र हिमालय पर्वत श्रृंखला का हिस्सा है,इस क्षेत्र में प्रमुख नदियाँ जैसे गंगा, यमुना और ब्रह्मपुत्र का उद्गम होता है, जो इसे भारत का जल स्रोत बनाती हैं। यहाँ जलवायु, भू-आकृति, और प्राकृतिक संसाधन इसे विशेष बनाते हैं।
उत्तर भारत का पर्वतीय प्रदेश(Uttar Bharat ka Parvatiya Pradesh)
उत्तर भारत का पर्वतीय प्रदेश अपनी प्राकृतिक सुंदरता और भौगोलिक विविधता के लिए प्रसिद्ध है। इसमें मुख्य रूप से हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख जैसे राज्य और केंद्र शासित प्रदेश शामिल हैं। इन क्षेत्रों को हिमालय की गोद में बसे होने का सौभाग्य प्राप्त है। यहाँ की बर्फ से ढकी चोटियाँ, हरे-भरे जंगल, झीलें और नदियाँ इसे पर्यटन के लिए आकर्षण का केंद्र बनाते हैं।

भारत को ऊँचाई और निचाई के आधार पर छह प्रमुख भौतिक विभागों में वर्गीकृत किया गया है, जो इसकी भौगोलिक विविधता को दर्शाते हैं:
हिमालय पर्वतीय प्रदेश
- हिमालय के गर्भ भाग में स्थित चट्टानें आग्नेय (ग्रेनाइट, नीस व शिष्ट) प्रकार की है, जो अत्यन्त प्राचीन है।
- हिमालय पर्वत एक ’नवीन वलित एवं युवा’ पर्वतमाला है, जिसकी उत्पत्ति ’कैन्योजोइक कल्प’ के ’टर्शियरी काल’ में हुई।
- विश्व की सबसे ऊँची पर्वत श्रेणी ’हिमालय’ है। यह विश्व की तीसरी सबसे लम्बी पर्वत शृंखला है।
- यह सबसे अधिक सतत् शृंखला है।
- करोड़ो वर्ष पूर्व एक महासागर पेंथालासा एवं एक महाद्वीप पेंजिया था, जिनके बीच की स्थिति टैथिस सागर के रूप में थी, जिसके कारण यह दो भागों में बँट गया। उत्तरी भाग अंगारालैण्ड एवं दक्षिणी भाग गौड़वाना लैण्ड कहलाता. था। इन दोनों भू-भागों से नदियों द्वारा बहाकर लाया गया मलबा टैथिस सागर में जमा हो गया, जिस पर अंगारालैण्ड व गौंडवानालैण्ड का दबाव पड़ा, जिससे इसका यह भाग ऊपर उठकर मध्य महाद्वीपीय पर्वत क्रम में बदल गया।

- हिमालय पर्वतमाला भारत की उत्तरी सीमा पर पश्चिम से पूर्व वृहत्त चाप के रूप में 5 लाख वर्ग किमी. क्षेत्र में 22 देशान्तरों के मध्य फैली हुई है।
- हिमालय पर्वतमाला का विस्तार भारत में सिंधु नदी घाटी के नंगा पर्वत (जम्मू-कश्मीर) से लेकर ब्रह्मपुत्र की घाटी के नामचा बरवा (अरुणाचल प्रदेश) तक है।
- हिमालय पर्वत की लम्बाई 2500 किमी. है तथा चौड़ाई कश्मीर में 400 किमी. और अरुणाचल प्रदेश में 150 किमी.) है। इसकी औसत ऊँचाई 6100 मी. है।
- एशिया महाद्वीप में 7300 मी. से ऊँची 94 चोटियाँ हैं, जिनमें से 92 चोटियाँ हिमालय एवं काराकोरम पर है। हिमालय की कई चोटियाँ 8000 मीटर से भी अधिक ऊँची है।
- हिमालय भारत के 11 राज्यों में – जम्मू (केन्द्रशासित प्रदेश), हिमाचल प्रदेश, सिक्किम, पश्चिम बंगाल, असम, अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मेघालय, मणिपुर, त्रिपुरा व मिजोरम आदि राज्यों में विस्तृत है।
- हिमालय अपनी वर्षा का अधिकांश भाग दक्षिण पश्चिम मानसून से प्राप्त करता है।
- पश्चिमी भाग की अपेक्षा हिमालय के पूर्वी भाग की ऊँचाई में जैव विविधता अधिक पाई जाती है।
प्रायद्वीपीय पठार: विशेषताएं, वर्गीकरण
हिमालय का भौगोलिक विभाजन (Himalaya ka Bhogolik Vibhajan)-
हिमालय का भौगोलिक विभाजन(Geographical Division of Himalayas) मुख्य रूप से चार प्रमुख श्रेणियों में किया जाता है, जो इसके भौगोलिक और भौतिक विशेषताओं को दर्शाते हैं। हिमालय पर्वतमाला को उपविभाजन के आधार पर चार भागों में बांटा गया है –
- महान हिमालय
- लघु हिमालय
- शिवालिक हिमालय
- ट्रांस हिमालय

(1) महान हिमालय
- महान हिमालय को वृहद् हिमालय, आन्तरिक हिमालय, ग्रेट हिमालय, हिमाद्री हिमालय आदि उपनामों से जाना जाता है।
- महान हिमालय हिमालय का सबसे प्राचीन, सबसे लम्बा व सबसे ऊँचा भाग है, जो इयोसीन युग में 750 करोड़ साल पहले बना। इसी कारण महा हिमालय को ’हिमालय पर्वत की रीढ़’ कहते हैं।
- यह हिमालय की सबसे ऊँची श्रेणी है।
- इस पर्वत श्रृंखला की सबसे ऊँची चोटियाँ सदैव बर्फ से ढकी रहती है इसलिए इसे ’बर्फीला हिमालय’ कहते हैं।
- तिब्बत का पठार के उत्तर में कुनलुन पर्वत श्रेणी व दक्षिण में महान हिमालय श्रेणी के मध्य स्थित है, यहाँ सदा बर्फ जमी रहती है इसलिए इसे भारतीय ग्रन्थों में ’हिमाद्री’ कहा गया है।
- इस हिमाद्री हिमालय पर बड़े-बड़े ग्लेशियर हैं, जिनसे नदियाँ निकलती है अतः हिमाद्री हिमालय जल संसाधनों की दृष्टि से अत्यधिक महत्वपूर्ण है।

- यह पर्वत श्रेणी सिन्धु नदी के मोड़ पर स्थित ’नंगा पर्वत’ (8126 मी. जम्मू-कश्मीर) से ब्रह्मपुत्र नदी के मोड़ पर स्थित ’नामचा बरवा’ (7756 मी. अरुणाचल प्रदेश) तक विस्तृत है।
- इसकी लंबाई 2400 किमी. है और चौड़ाई 25 किमी. है। महान हिमालय की औसत ऊँचाई 6000 मी. है।
- हिमालय का दक्षिणी ढ़ाल भारत की ओर खड़ा/तीव्र बड़ा है, जबकि ’उत्तर’ (तिब्बत) की ओर वाला मन्द ढ़ाल है।
- इस श्रेणी के मध्यवर्ती भाग से गंगा- यमुना और उसकी सहायक नदियों का उद्गम है एवं इस श्रेणी को काटकर सिंधु, ब्रह्मपुत्र एवं अलकनंदा नदियों ने पूर्ववर्ती घाटियों का निर्माण किया।
- लघु हिमालय की परतदार चट्टानों में समुद्री जीव-जन्तुओं के जीवाश्म मिलते हैं।
- महान हिमालय लघु हिमालय से ’मैन सैन्ट्रल थ्रस्ट’ द्वारा अलग होता है।
- गंगा व यमुना नदियाँ महान हिमालय से ही निकलती हैं।
- महान हिमालय पर्वत श्रेणी में विश्व की सबसे ऊँची चोटी माउण्ट एवरेस्ट (नेपाल) स्थित है।
महान हिमालय पर्वत की प्रमुख पर्वत चोटियाँ –
| पर्वत | देश | ऊँचाई |
| माउण्ट एवरेस्ट | नेपाल | 8848 मी. |
| कंचनजंगा | भारत (सिक्किम) | 8598 मी. |
| मकालु | नेपाल | 8481 मी. |
| धौलागिरि | नेपाल | 8172 मी. |
| मंशालू | नेपाल | 8152 मी. |
| नंगा पर्वत | भारत | 8126 मी. |
| अन्नपूर्णा | नेपाल | 8078 मी. |
| नंदादेवी | भारत (उत्तराखण्ड) | 7817 मी. |
| कामेट | भारत | 7756 मी. |
| नामचा बरवा | भारत | 7756 मी. |
| गुरुला मंधाता | भारत | 7728 मी. |
1. माउण्ट एवरेस्ट – इसे ’सागर माथा’ एवं नेपाल में ’गौरीशंकर’ एवं चीन में ’चोमोलुगमा’ कहा जाता है। इसकी ऊँचाई 8848 मीटर है। यह नेपाल में स्थित है। माउंट एवरेस्ट की खोज 1849-55 के मध्य भारतीय सर्वेक्षण विभाग के अधिकारी ’सर जॉर्ज एवरेस्ट’ ने की थी।
2. गोडविन ऑस्टिन K2 – भारत की सबसे ऊँची चोटी है, जो वर्तमान में पाक अधिकृत कश्मीर में है। इसकी ऊँचाई 8611 मी. है।
3. कंचनजंगा – भारत की दूसरी सबसे ऊँची चोटी एवं पूर्ण रूप से भारत के अधिकार में स्थित भारत की सबसे ऊँची चोटी है, जो सिक्किम में स्थित है। इसकी ऊँचाई 8598 मी. है।
महान हिमालय में पाये जाने वाले दर्रे –
- नाथुला दर्रा
- शिपकीला दर्रा
- काराकोरम दर्रा
- जोजिला दर्रा
- माना व नीति दर्रा
- अशील दर्रा
महान हिमालय पर स्थित हिमनद –
- यमुनोत्री
- गंगोत्री
- चोराबारी
- सतोपंथ
- गोर्साइं धाम
- जेमू हिमनद
(2) लघु हिमालय
- लघु हिमालय को मध्य हिमालय, हिमालय का धड़, निम्न हिमालय व हिमाचल हिमालय आदि उपनामों से जाना जाता है।
- लघु हिमालय महान् हिमालय से ’महान भ्रंश रेखा’ के द्वारा पृथक होता है।
- लघु हिमालय शिवालिक और महान हिमालय के मध्य में अवस्थित है।
- यह महान हिमालय के दक्षिण में स्थित है।
- यह अत्यधिक संपीडित तथा परिवर्तित शैलों से निर्मित है।
- यह लघु हिमालय महान हिमालय के समानान्तर दक्षिण में स्थित है, जहाँ स्थित पर्वत श्रेणियाँ वर्ष में दो-तीन महीने हिमाच्छादित रहती है।

- लघु हिमालय का निर्माण मायोसीन युग में लगभग 350 करोड़ साल पहले हुआ।
- लघु हिमालय की लम्बाई 2500 किमी. व चौड़ाई पूर्व से पश्चिम 50 किमी. और ऊँचाई 3700 से 4500 मी. है।
- लघु हिमालय की सबसे लम्बी पर्वत शृंखला ’पीर पंजाल’ है।
- ’पीरपंजाल’ (जम्मु-कश्मीर) व ’धौलाधर श्रेणी’ इसका पश्चिमी विस्तार है।
- इसकी प्रमुख पर्वत शृंखलायें – पीरपंजाल, धौलाधर व महाभारत है।
- इस पर्वत श्रेणी में कायान्तरित चट्टानें पाई जाती हैं, जिनमें जीवावशेषों का अभाव पाया जाता है।
- लघु हिमालय के ढ़ालों पर पाये जाने वाले घास के मैदानों को कश्मीर में ’मर्ग’ तथा उत्तराखण्ड में ’बुग्याल/बयार’ कहते हैं।
- यहाँ की जलवायु स्वास्थ्यवर्धक होने के कारण यहाँ कई पर्यटन नगरों का विकास हुआ है। जैसे – शिमला, मंसूरी, दाजिर्लिंग, श्रीनगर, मण्डी, देहरादून इत्यादि। इसी कारण लघु हिमालय की महत्ता पर्यटन की दृष्टि से है।
- यह क्षेत्र पहाड़ी नगरों के लिए प्रसिद्ध है, जैसे – उत्तराखण्ड में मसूरी, नैनीताल एवं रानीखेत।
- इस शृंखला में कश्मीर की घाटी तथा हिमाचल के कांगड़ा एवं कुल्लू की घाटियाँ स्थित है।
लघु हिमालय के कुछ प्रमुख दर्रे –
- नाथूला दर्रा (सिक्किम)
- जेलेप्पा दर्रा (सिक्किम)
- नीति दर्रा (उत्तराखण्ड)
- शिपिकला दर्रा (हिमाचल प्रदेश)
- बारालाचा दर्रा (हिमाचल प्रदेश)
- रोहितांग दर्रा (हिमाचल प्रदेश)
लघु हिमालय की श्रेणियाँ –
| लघु हिमालय का पश्चिम से पूर्व श्रेणियों में विभाजन | |
| श्रेणी | अवस्थिति |
| पीरपंजाल श्रेणी | जम्मू कश्मीर |
| धौलाधर श्रेणी | हिमाचल प्रदेश |
| मसूरी श्रेणी | उत्तराखण्ड |
| महाभारत श्रेणी | नेपाल |
मध्य हिमालय एवं महान हिमालय के मध्य की प्रमुख घाटियाँ –
- कश्मीर घाटी (पीरपंजाल)
- काठमाण्डू घाटी (नेपाल)
- कांगड़ा घाटी व कुल्लु घाटी (हिमाचल प्रदेश)
(3) शिवालिक हिमालय
- शिवालिक हिमालय को उप हिमालय व बाह्य हिमालय आदि उपनामों से जाना जाता है।
- यह हिमालय की सबसे नवीनतम पर्वतमाला है, जिसका निर्माण प्लियोसीन युग में 1 करोड़ वर्ष पूर्व हुआ।
- यह शृंखला उत्तर में स्थित मुख्य हिमालय की शृंखलाओं से नदियों द्वारा लायी गयी असंपीडित अवसादों से बनी है।
- शिवालिक पर्वत लगातार नहीं होकर टुकड़ों में विभक्त है। इस पर्वत श्रेणी का विस्तार पश्चिम में पाकिस्तान के पोटवार बेसिन से असम के दिहांग (कोसी नदी) तक है।
- इस क्षेत्र से निकलने वाली नदियाँ कंकड, पत्थर व जलोढ़ पंक का निर्माण करती है, जिसे ’भाबर’ कहते हैं। भाबर का दक्षिणी भाग तराई कहलाता है।

- यह हिमालय की सबसे बाह्य शृंखला है।
- यह हिमालय के बाहरी क्षेत्र की श्रेणी होने के कारण यह हिमालय की अन्तिम श्रेणी है। यह हिमालय की सबसे दक्षिणतम शृंखला है। इसके दक्षिण में उत्तर का विशाल मैदान है।
- उपहिमालय की औसत चौड़ाई 10 से 50 किमी. एवं ऊँचाई 900 से 1100 मी. है।
- लघु हिमालय (निम्न हिमालय) व शिवालिक हिमालय के बीच में स्थित लंबवत् घाटी को ’दून’ के नाम से जाना जाता है। कुछ प्रसिद्ध दून हैं – देहरादून, कोटलीदून एवं पाटलीदून।
- शिवालिक और लघु हिमालय के बीच कई घाटियाँ हैं, जैसे – काठमांडू घाटी। पश्चिम में इन्हें ’द्वार’ कहते है, जैसे – हरिद्वार। इन घाटियों में गहन खेती की जाती है और यह घनी बसी है।
(4) ट्रांस हिमालय
- ट्रांस हिमालय को ’तिब्बत हिमालय’ भी कहा जाता है।
- हिमालय का सबसे ऊपरी भाग ट्रांस हिमालय है।
- संस्कृत भाषा में इस पर्वतमाला को ’कृष्णागिरी’ कहा गया है।
- ट्रांस हिमालय की औसत ऊँचाई 4000-4500 मीटर तक है।

- ट्रांस हिमालय में चार चोटियाँ पायी जाती है, जो अवसादी चट्टानों से निर्मित पूर्णतया वनस्पति रहित हिमालय की ’उत्तरत्तम’ पर्वत श्रेणी है, जो ग्रेट हिमालय के उत्तर में इसके समानान्तर व तिब्बत के दक्षिणी भाग में स्थित है।
- ट्रांस हिमालय की सबसे ऊँची चोटी गॉडविन ऑस्टिन (K2) है।
- ट्रांस हिमालय में विश्व की सर्वाधिक तीव्र ढाल वाली ’राकापोशी चोटी’ स्थित है।
- ट्रांस हिमालय के अंतर्गत काराकोरम, लद्दाख, जास्कर एवं कैलाश पर्वत श्रेणियाँ सम्मिलित हैं।
- ट्रांस हिमालय वृहत् हिमालय से ’इंडो-सांगपो शचर जोन’ के द्वारा अलग होती है।
ट्रांस हिमालय के पर्वतीय उपभाग –
ट्रांस हिमालय तीन समानान्तर पर्वत शृंखलाओं से मिलकर बना है।
- जास्कर
- लद्दाख
- काराकोरम
(1) जास्कर पर्वत श्रेणी – यह महान हिमालय के पूर्वी देशान्तर पर अलग होती है। जास्कर श्रेणी की सबसे ऊँची चोटी ’नंगा पर्वत’ है। भारत का सबसे ठण्डा स्थान ’द्रास’ है, जो जम्मू-कश्मीर में है। जास्कर श्रेणी में शेषनाग तथा वेरीनाग झीलें स्थित है।
(2) लद्दाख श्रेणी – यह श्रेणी 300 किमी. लम्बी एवं 5800 मी. ऊँची है। यह जास्कर पर्वत श्रेणी के उत्तर में उसके समानान्तर फैली हुई। इसी लद्दाख पर्वत श्रेणी के पूर्व में कैलाश पर्वत श्रेणी है, जहाँ से सिंधु ब्रह्मपुत्र नदी निकलती है आगे यह पहाड़ियाँ लेह लद्दाख पर्वत श्रेणियों के रूप में फैली हुई है। लद्दाख श्रेणी में ’अक्साई चीन’ अवस्थित है। लद्दाख श्रेणी की सर्वोच्च चोटी ’राकापोशी’ (7788 मी.) है, जो विश्व की सबसे तीव्र ढाल वाली चोटी है। इसके उत्तर में काराकोरम पर्वत श्रेणी है।
(3) काराकोरम पर्वत श्रेणी – काराकोरम पर्वत श्रेणी को ’उच्च हिमालय की रीढ़’ कहा जाता है। जो पश्चिम में पामीर की एवं पूर्व में कैलाश श्रेणी के रूप में विस्तृत है। ट्रान्स हिमालय को ’कृष्णागिरी पर्वत’ भी कहा जाता है।
काराकोरम पर्वत श्रेणी की प्रमुख चोटियाँ –
- गॉडविन ऑस्टिन (K2) – भारत की सबसे ऊँची चोटी तथा विश्व की दूसरी सबसे ऊँची चोटी K2 8611 मीटर, जम्मू-कश्मीर में ’काराकोरम पर्वत श्रेणी’ में स्थित है।
- हिडन पीक (ऊँचाई 8068 मी.)
- ब्रोडपीक (ऊँचाई 8047 मी.)
काराकोरम पर्वत शृंखला के प्रमुख हिमनद –
- सियाचिन (यह भारत का सबसे बड़ा हिमनद ग्लेशियर है।)
- बाल्टोरो
- साल्टोरो
- हिस्पर
- हुंजा
- बैफो
हिमालय का प्रादेशिक वर्गीकरण(Himalaya ka Pradeshik Vibhajan)
हिमालय का प्रादेशिक वर्गीकरण इसे विभिन्न भौगोलिक विशेषताओं और स्थानिक विस्तार के आधार पर विभाजित करता है। सिडनी बुर्रार्ड ने नदी घाटियों के आधार पर हिमालय का चार भागों में प्रादेशिक वर्गीकरण किया है।
- पंजाब हिमालय
- कुमाऊँ हिमालय
- नेपाल हिमालय
- असम हिमालय
| हिमालय का प्रादेशिक विभाजन | ||
| प्रादेशिक भाग | लंबाई | विस्तार |
| 1. पंजाब हिमालय | 560 किमी. | सिंधु व सतलुज नदी के मध्य |
| 2. कुमाऊँ हिमालय | 320 किमी. | सतलुज व काली नदी के मध्य |
| 3. नेपाल हिमालय | 800 किमी. | काली व तिस्ता नदी के मध्य |
| 4. असम हिमालय | 750 किमी. | तिस्ता-दिहांग व ब्रह्मपुत्र नदी के मध्य |
1. पंजाब हिमालय
पंजाब हिमालय की खूबसूरती और महत्व के बारे में जानें! अब हम पंजाब हिमालय की पहाड़ियों, घाटियों, नदियों, और विशेष तथ्यों के बारे में विस्तार से चर्चा करेंगे।
- पंजाब हिमालय को कश्मीर हिमालय और हिमाचल हिमालय के उपनामों से जाना जाता है।
- इसका विस्तार जम्मू-कश्मीर एवं हिमाचल प्रदेश में है।
- इसका विस्तार ’सिन्धु नदी’ से लेकर ’सतलज नदी’ तक है।
- इसकी लम्बाई 560 किमी. है तथा इसका क्षेत्रफल 4500 वर्ग किमी. में है।
- इसकी प्रमुख श्रेणियाँ – काराकोरम, लद्दाख, पीर पंजाल, जास्कर, धौलाधर इत्यादि।
- पंजाब हिमालय के अंतर्गत वैष्णो देवी का मंदिर, अमरनाथ की गुफा तथा चिरार-ए-शरीफ है।
2. कुमाऊँ हिमालय
“कुमाऊँ हिमालय, उत्तराखंड का एक सुंदर पर्वतीय क्षेत्र है, जो नंदा देवी, त्रिशूल, और पिंडारी ग्लेशियर जैसी प्राकृतिक अद्भुत संरचनाओं और धार्मिक स्थलों के लिए प्रसिद्ध है। कुमाऊँ हिमालय की प्राकृतिक सुंदरता और भौगोलिक विशेषताओं के बारे में जानें! अब हम कुमाऊँ हिमालय की पहाड़ियों, घाटियों, नदियों, और जलवायु के बारे में विस्तार से चर्चा करेंगे।
- इसका विस्तार ’सतलज नदी’ से लेकर ’काली नदी’ तक है।
- इसकी लम्बाई 320 किमी. है। इसका क्षेत्रफल 38000 वर्ग किमी. है। यह लम्बाई एवं क्षेत्रफल के आधार पर सबसे छोटा है।
- इसका विस्तार उत्तराखंड व हिमाचल प्रदेश में है।
- इसका पश्चिमी भाग गढ़वाल हिमालय एवं पूर्वी भाग कुमायँु हिमालय कहलाता है, जिसमें ’फूलों की घाटी’ स्थित है।
- कुमाऊँ हिमालय की सबसे ऊँची चोटी नंदा देवी (7817 मी.- उत्तराखण्ड) है।
- यह गंगा, भागीरथी, अलकनंदा एवं यमुना नदी का उद्गम स्थल भी है।
- इसकी प्रमुख श्रेणियाँ – कामेत, त्रिशूल, बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री, नंदादेवी आदि है। कुमायूँ हिमालय में ’गंगोत्री हिमनद’ अवस्थित है।
3. नेपाल हिमालय
“नेपाल हिमालय, विश्व की सबसे ऊंची पर्वत श्रृंखला का घर है, जिसमें माउंट एवरेस्ट और अन्नपूर्णा जैसे शिखर शामिल हैं। यह क्षेत्र अपनी अद्वितीय प्राकृतिक सुंदरता और साहसिक गतिविधियों के लिए प्रसिद्ध है।”नेपाल हिमालय की अद्वितीय सुंदरता और भौगोलिक विशेषताओं के बारे में जानें! अब हम नेपाल हिमालय की सबसे ऊंची चोटियों, घाटियों, नदियों, और जलवायु के बारे में विस्तार से चर्चा करेंगे।
- नेपाल हिमालय को सिक्किम में सिक्किम हिमालय, पश्चिम बंगाल में दार्जिलिंग हिमालय तथा भूटान में भूटान हिमालय आदि उपनामों से जाना जाता है।
- इसका विस्तार ’काली नदी’ से लेकर ’तिस्ता नदी’ तक है।
- इसकी लम्बाई 800 किमी. है। इसका क्षेत्रफल 1,168,00 वर्ग किमी. है।
- यह हिमालय का सबसे ऊँचा भाग है।
- काठमाण्डु इसकी प्रमुख घाटी है।
- यहाँ कुछ कोणधारी वन – देवदार, स्प्रूस, फर व चीड़ पाये जाते है।
- इसकी प्रमुख श्रेणियाँ निम्नवत् हैं- कंचनजंघा, मकालु, मसालु, धोलागिरि, चौओयुं, अन्नपूर्णा इत्यादि।
- गंगा की सहायक नदियों में घाघरा, गंडक, कोसी नदियों का उद्गम यहीं से होता है।
4. असम हिमालय
“असम हिमालय, भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्र का एक खूबसूरत हिस्सा है, जो अरुणाचल प्रदेश और असम के पहाड़ी इलाकों में फैला है। यह क्षेत्र समृद्ध जैव विविधता और प्राकृतिक सुंदरता के लिए प्रसिद्ध है।” असम हिमालय की प्राकृतिक सुंदरता और भौगोलिक विशेषताओं के बारे में जानें! अब हम असम हिमालय की पहाड़ियों, घाटियों, नदियों, और जलवायु के बारे में विस्तार से चर्चा करेंगे, जो पूर्वी हिमालय का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
- इसका विस्तार ‘तिस्ता-दिहांग नदी’ से लेकर ‘ब्रह्मपुत्र नदी’ तक है।
- इसकी लम्बाई 750 किमी. है। इसका क्षेत्रफल 67500 वर्ग किमी. है।
- यह सिक्किम, असम और अरुणाचल प्रदेश में फैला हुआ है।
- इसकी प्रमुख श्रेणियाँ – नामचा बरवा, कुलाकांगड़ी एवं चोमोलाहारी इत्यादि है।
- इसकी प्रमुख नदी ब्रह्मपुत्र है।
पूर्वांचल पहाड़ियाँ
- ब्रह्मपुत्र हिमालय की सबसे पूर्वी सीमा बनाती है।
- दिहांग महाखड्ड के बाद हिमालय दक्षिण की ओर एक तीखा मोड़ बनाते हुए भारत की पूर्वी सीमा के साथ फैल जाता है।
- ये पहाड़ियाँ उत्तर-पूर्वी राज्यों से होकर गुजरती हैं।
- यह पहाड़ियाँ मजबूत बलुआ पत्थरों यानी अवसादी शैलों से बनी है।
- यह पहाड़ियाँ घने जंगलों से ढकी है। यह अधिकतर समानांतर शृंखलाओं एवं घाटियों के रूप फैली है।
- पूर्वांचल पहाड़ियों में पटकाई बूम (अरुणाचल प्रदेश),नागा (नागालैेण्ड), मिजो (मिजोरम), त्रिपुरा तथा मणिपुर पहाड़ियाँ शामिल हैं।
हिमालय की प्रमुख पर्वत चोटियाँ(Major mountain peaks of the Himalayas)
हिमालय की प्रमुख पर्वत चोटियाँ: हिमालय पर्वत श्रृंखला में स्थित दुनिया की सबसे ऊंची और सबसे प्रतिष्ठित पर्वत चोटियों के बारे में जानें। माउंट एवरेस्ट, कंचनजंगा, नंदा देवी, और अन्य प्रमुख चोटियों के बारे में विस्तार से जानकारी दी जा रही है।
| चोटी | ऊँचाई | अवस्थिति |
| माउंट एवरेस्ट | 8,848 मी | नेपाल |
| गॉडविन ऑस्टिन (K2) | 8,611 मी. | भारत |
| कंचनजंगा | 8,598 मी. | भारत/नेपाल |
| मकालू | 8,481 मी. | नेपाल |
| धौलागिरी | 8,172 मी. | नेपाल |
| नंगा पर्वत | 8,126 मी. | भारत |
| अन्नपूर्णा | 8,078 मी. | नेपाल |
| नंदा देवी | 7,817 मी. | भारत |
| नामचा बरवा | 7,756 मी. | तिब्बत |
| केदारनाथ | 6,945 मी. | भारत |
हिमालय के प्रमुख दर्रे(Major Passes of Himalayas)
हिमालय के प्रमुख दर्रे भारत के भौगोलिक और सांस्कृतिक दृष्टिकोण से अत्यधिक महत्वपूर्ण हैं। ये दर्रे पर्वत श्रृंखलाओं के बीच से होकर गुजरने वाले प्राकृतिक मार्ग हैं, जो प्राचीन समय से ही व्यापार, सांस्कृतिक आदान-प्रदान, और रणनीतिक गतिविधियों के लिए उपयोग किए जाते रहे हैं। ये दर्रे सामरिक और पर्यावरणीय दृष्टि से भी महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि वे हिमालयी क्षेत्र की जलवायु, पारिस्थितिकी और पर्यटन को प्रभावित करते हैं। हिमालय के दर्रे भारतीय इतिहास, संस्कृति, और भौगोलिक संरचना का अभिन्न हिस्सा हैं।
1. जम्मू-कश्मीर के प्रमुख दर्रे –
काराकोरम दर्रा – यह दर्रा काराकोरम पर्वत श्रेणी में स्थित है, भारत का सबसे ऊँचा (5654 मीटर) दर्रा है। इस दर्रे से ’लेह लद्दाख से मध्य एशिया’ जाने का मार्ग मिलता है।
जोजीला दर्रा – यह जास्कर श्रेणी में स्थित है। इस दरें से ’श्रीनगर से लेह’ जाने का मार्ग गुजरता है।
पीरपंजाल दर्रा – यह दक्षिणी-पश्चिमी जम्मू-कश्मीर में स्थित है, जिसमें से ‘कुलागाँव से कोठी’ जाने का मार्ग गुजरता है।
बनिहाल दर्रा – यह पीरपंजाल की श्रेणी में स्थित है।. यह दर्रा ’जम्मू-कश्मीर से श्रीनगर’ जाने का मार्ग गुजरता है।
बुर्जिल दर्रा – यह कश्मीर व मध्य एशिया में स्थित है। इस दर्रे से ’श्रीनगर से गिलगिट’ जाने का मार्ग गुजरता है।
2. हिमाचल प्रदेश के प्रमुख दर्रे –
शिपकीला दर्रा – यह जास्कर श्रेणी में स्थित है। यहाँ से शिमला से तिब्बत जाने का मार्ग गुजरता है। सतलज नदी भारत में इसी दर्रे से प्रवेश करती है।
रोहतांग दर्रा – यह पीरपंजाल श्रेणी में स्थित है। भारत में रावी व व्यास नदी की उत्पत्ति इस दर्रे के निकट से है। रोहतांग दर्रा पीर पंजाल श्रेणी को काटता है और मनाली को लेह से सड़क मार्ग द्वारा जोड़ता है।
बाडालाचा दर्रा – यह जास्कर श्रेणी में स्थित है। जम्मू-कश्मीर में चिनाब नदी इस दर्रे से गुजरती है। यह दर्रा मंडी से लेह को सड़क मार्ग द्वारा जोड़ता है।
बारालाचला दर्रा – यह धौलाधर श्रेणी में स्थित है। यह दर्रा लेह में स्थित है।
3. उत्तराखण्ड के दर्रे –
माना दर्रा व नीति दर्रा (5389 मी.) – ये दोनों कुमाऊँ श्रेणी में है। इन दर्रों से ‘मानसरोवर व कैलाश’ जाने का मार्ग गुजरता है।
लिपुलेख दर्रा – यह कुमायूँ क्षेत्र (उत्तराखण्ड) को तकला कोट (तिब्बत) से जोड़ने वाला दर्रा है। यह एक व्यापारिक मार्ग है, जिसे 1992 में खोला गया।
4. सिक्किम के प्रमुख दर्रे –
नाथुला दर्रा – यह दर्रा डोगेक्या श्रेणी में है तथा इससे ’दार्जिलिंग तथा चुम्बीघाटी से तिब्बत’ जाने का मार्ग गुजरता है। यह भारत-चीन का व्यापारिक मार्ग है।
जेलेप्ला दर्रा – यह दर्रा डोगेक्या श्रेणी में है तथा इससे ’कालिम्पोंग से तिब्बत’ (चुम्बीघाटी) जाने का मार्ग गुजरता है।
5. अरुणाचल प्रदेश के प्रमुख दर्रे –
बोम्डीला दर्रा – अरुणाचल प्रदेश के उत्तर-पश्चिम में स्थित इस दर्रे से त्वांग घाटी से तिब्बत जाने का मार्ग गुजरता है।
यांग्याप दर्रा – यह दर्रा मिस्मी श्रेणी में स्थित है तथा इसके निकट से ब्रह्मपुत्र नदी भारत में प्रवेश करती है। इसी दर्रे से चीन जाने का मार्ग गुजरता है।
दिफू दर्रा, पांगसाड दर्रा – ये दोनों दर्रे पटकोई श्रेणी में स्थित है। यहाँ से म्यांमार जाने का मार्ग गुजरता है अर्थात् यह अरुणाचल प्रदेश को म्यांमार से जोड़ता है।
6. मणिपुर के दर्रे –
तुजु दर्रा – मणिपुर का एकमात्र दर्रा जिससे म्यांमार जाने का गुजरता है।
हिमालय पर्वत श्रेणी के प्रमुख हिमनद(Major glaciers of the Himalayan mountain range)
हिमालय पर्वत श्रेणी के प्रमुख हिमनद: हिमालय पर्वत श्रेणी में स्थित दुनिया के सबसे बड़े और सबसे महत्वपूर्ण हिमनदों के बारे में जानें। सियाचिन हिमनद, गंगोत्री हिमनद, यमुनोत्री हिमनद, और अन्य प्रमुख हिमनदों के बारे में विस्तार से जानकारी दी जा रही है।
| हिमालय में स्थित हिमनद | ||
| हिमनद | लंबाई | अवस्थिति |
| सियाचिन | 76 किमी. | काराकोरम |
| बियाफो | 62 किमी. | काराकोरम |
| हिस्पर | 61 किमी. | काराकोरम |
| बाल्टोरो | 58 किमी. | काराकोरम |
| बातुरा | 58 किमी. | काराकोरम |
| रिमों | 40 किमी. | काराकोरम |
| चोगोलुँग्मा | 50 किमी. | काराकोरम |
| खुर्दोपिन | 41 किमी. | काराकोरम |
| बारा सिगरी | 27.7 किमी. | हिमाचल प्रदेश |
| पुन्माह | 27 किमी. | काराकोरम |
| गंगोत्री | 30 किमी. | कुमाऊँ/उत्तराखण्ड |
| जेमू | 26 किमी. | कंचनजंगा |
| मिलाम | 19 किमी. | कुमाऊँ/उत्तराखण्ड |
| सासाइनी | 17.85 किमी. | काराकोरम |
| रूपल | 16 किमी. | वृहद हिमालय |
| सोनापानी | 11 किमी. | कश्मीर |
| छोटा सिगरी | 9 किमी. | हिमाचल प्रदेश |
| चोराबाड़ी | 7 किमी. | उत्तराखण्ड |
निष्कर्ष :
उत्तर भारत के पर्वतीय प्रदेश हिमालय की गोद में बसे हुए हैं, जो दुनिया की सबसे ऊंची पर्वत श्रृंखला है। इस क्षेत्र में पंजाब हिमालय, कुमाऊँ हिमालय, नेपाल हिमालय, और असम हिमालय जैसे विभिन्न उप-क्षेत्र शामिल हैं।इन पर्वतीय प्रदेशों में विविध भौगोलिक विशेषताएं हैं, जिनमें ऊंची चोटियाँ, गहरी घाटियाँ, और बहती नदियाँ शामिल हैं। यह क्षेत्र अपनी प्राकृतिक सुंदरता और जैव विविधता के लिए प्रसिद्ध है।
प्रायद्वीपीय पठार: विशेषताएं, वर्गीकरण
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